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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पनबिजली क्षेत्र को बढ़ावा देने के उपायों को दी मंजूरी

Thu, 07 Mar 2019 05:41 PM IST
Gaurav Pandey भाषा, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को पनबिजली क्षेत्र को बढ़ावा देने के उपायों को मंजूरी दे दी। इनमें गैर-सोलर अक्षय ऊर्जा क्रय बाध्यता (आरपीओ) के हिस्से के रूप में बड़ी पनबिजली परियोजनाओं की घोषणा शामिल है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, बड़ी पनबिजली योजनाओं की घोषणा अक्षय ऊर्जा स्रोत के रूप में की जाएगी। बता दें कि मौजूदा प्रचलन के अनुसार, केवल 25 मेगावॉट से कम क्षमता वाले पनबिजली परियोजनाओं को अक्षय ऊर्जा के रूप में श्रेणीबंध किया गया है।

इन उपायों की अधिसूचना के बाद शुरू की गई बड़ी पनबिजली योजनाएं गैर-सोलर अक्षय ऊर्जा क्रय बाध्यता के तहत पनबिजली योजनाएं इनमें शामिल होंगी। लघु पनबिजली परियोजनाएं पहले से ही इनमें शामिल हैं।
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पनबिजली क्षेत्र में अतिरिक्त परियोजना क्षमता के आधार पर विद्युत मंत्रालय द्वारा बड़ी पनबिजली परियोजनाओं के वार्षिक लक्ष्यों के बारे में अधिसूचित किया जाएगा। बड़ी पनबिजली परियोजनाओं के संचालन के लिए शुल्क नीति और शुल्क नियमनों में आवश्यक संसोधन किए जाएंगे।

सरकार का मानना है कि इससे विद्युत क्षेत्र में प्रत्यक्ष रोजगार मिलने से क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित होगा। इससे परिवहन, पर्यटन और अन्य छोटे कारोबारी क्षेत्र में अप्रत्यक्ष रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी उपलब्ध होंगे।

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