भारत अर्थव्यवस्था के आकार के मामले में 10वें स्थान से पांचवें पर आ गया है। 2014 से देशवासियों की आमदनी में दोगुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। अब प्रतिव्यक्ति आय 1.97 लाख रुपये है। और भारत वित्त वर्ष में 7.5 प्रतिशत की विकास दर को हासिल करेगा। भारत सरकार ने 45 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया और राजकोषीय घाटे को 4.6 प्रतिशत के कठिन लक्ष्य पर लाया जाएगा।
यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया बजट है, जो साफ संकेत कर रहा है कि इस साल देश में नौ राज्यों के बाद अगले साल आम चुनाव हैं। कई सालों बाद केंद्र सरकार मध्यम वर्ग पर मेहरबान हुई है और गरीबों के लिए जनवरी 2024 तक मुफ्त अनाज वितरण की योजना को जारी रखने की घोषणा की गई है।
मुफ्त अनाज वितरण योजना को जारी रखने के लिए केंद्र सरकार ने दो लाख करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की है। ताकि देश में कोई भी भूखा न सोए (खाद्य सुरक्षा की गारंटी)। लेकिन आम बजट में बेरोजगारों के लिए कोई रौशनी नहीं दिखाई गई है। 47 लाख युवाओं को तीन साल के लिए स्टायपेंड देने का सपना जरूर सरकार ने दिखाया है। किसानों की झोली में सीधे तौर पर जाता कुछ नहीं दिखाई दे रहा है। किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से 20 लाख करोड़ लोन देने की घोषणा जरूर हुई है। यह भी एक सच्चाई है कि किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण तो ले रहे हैं, लेकिन इनका भुगतान एक बड़ी समस्या है।
समाजवादी पाटी की सांसद डिंपल यादव ने इस बजट पर सधी लाइन में प्रतिक्रिया दी है। डिंपल यादव ने कहा, यह चुनावी बजट है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे जनता के बीच में सरकार के गिरते भरोसे का सबूत बताया है। हालांकि वित्त मंत्री ने आम बजट 2023-24 को अर्थव्यवस्था को गति देने वाला अमृतकाल का बजट कहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे हर वर्ग के सपने को पूरा करने वाला बजट बताया है।
विपक्ष को आलोचना का बड़ा अवसर नहीं मिल पाया
वित्त मंत्री द्वारा पेश बजट की सबसे बड़ी खासियत मध्यम वर्ग को बजट में दी गई राहत रही। केंद्र सरकार कई साल से आयकर (इनकम टैक्स) को लेकर मध्यम वर्ग की उम्मीदों पर पानी फेर रही थी। इस बार मध्यम वर्ग की सुन ली है। इसके कारण विपक्ष बजट की तीखी आलोचना से बच रहा है। कांग्रेस के सांसद कार्ति चिदंबरम ने बजट के एक बड़े हिस्से को राष्ट्रपति के अभिभाषण और आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट की पुनरावृत्ति बताया। कार्ति चिदंबरम ने कहा कि आम बजट में टैक्स में कटौती की गई है। इससे लोगों के हाथ में पैसा जाएगा। लोगों में खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी। यह अर्थ व्यवस्था में तरलता लाने का अच्छा तरीका है।
लेकिन शशि थरूर आम बजट में मनरेगा का जिक्र और इसको लेकर वित्त मंत्री की घोषणा सुनना चाहते थे। थरूर कहते हैं कि मंहगाई, बेरोजगारी और मजदूरों के लिए सरकार के कुछ कर पाने का नजरिया बजट में कहीं दिखाई नहीं देता। इसको लेकर बजट ने कांग्रेस सांसद को निराश किया। शशि थरूर के मुताबिक इस तरह के कुछ पक्षों को छोड़ दें तो बजट के कई पहलू अच्छे हैं। शशि थरूर की तरह ही आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी बजट में किसान, नौजवान और जवान को होने वाली निराशा के मुद्दे को उठाया है।
आम बजट 2023-24 का बाजार ने स्वागत किया है। भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल के अध्यक्ष सुमंत सिन्हा के मुताबिक एमएसएमई क्षेत्र को बजट से राहत मिलेगी। इसके अलावा व्यापार में सुधार को बढ़ावा मिलेगा।
क्यों है राजनीतिक या चुनावी बजट?
बजट में जनवरी 2024 तक देश के 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन की घोषणा, महिला सम्मान बचत पत्र की घोषणा के साथ दो लाख रुपये के जमा पर 7.5 प्रतिशत ब्याज, 47 लाख युवाओं को स्टाइपेंड, किसान क्रेडिटकार्ड के माध्यम से 20 लाख करोड़ का लोन, मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर आयकर में राहत जैसे प्रावधान किया है। आयकर में छूट का लाभ लेकर नौकरी पेशा लोग सात लाख रुपये की आय तक कोई टैक्स अदा नहीं करेंगे। वित्त मंत्री ने घोषणा की कि मुफ्त अनाज योजना के तहत आने वाले दो लाख करोड़ रुपये के खर्च का वहन भी केंद्र सरकार ही करेगी।