केंद्रीय गृह मंत्रालय के बजट में इस बार 19 हजार करोड़ रुपये का इजाफा किया गया है। इसकी मदद से सीमा पर चौकसी व्यवस्था को और अधिक पुख्ता बनाने के लिए नए उपकरण खरीदे जाएंगे। साथ ही केंद्रीय सुरक्षा बलों के लिए नए मकान, वाहन, हथियार व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आदि से संबंधित योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा साइबर क्राइम पर अंकुश लगाने के लिए विभिन्न सुरक्षा संगठनों को नई तकनीक मुहैया कराई जाएगी। बॉर्डर एरिया में ड्रोन के जरिए सर्विलांस बढ़ेगा। दुश्मन के ड्रोन को समाप्त करने के लिए भी एक प्रभावशाली तकनीक पर काम किया जा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के जानकारों का कहना है कि बढ़ी हुई बजट राशि के जरिए जम्मू कश्मीर और उत्तर पूर्व के क्षेत्रों में आतंकियों के खात्मे के लिए लगे सुरक्षा बलों को कई तरह के संसाधन मुहैया कराए जाएंगे। इनमें संचार उपकरण, ड्रोन और आईईडी का पता लगाने वाली तकनीक भी शामिल है। आईईडी हमले से जवानों को बचाने के लिए सुरक्षा बलों को हाई टेक एमपीवी 'माइनिंग प्रोटेक्टेड व्हीकल' प्रदान किए जाएंगे। हालांकि इनकी खरीद प्रक्रिया पहले से ही चल रही है। इनकी तकनीक में कुछ बदलाव किए गए हैं। आतंकियों और उनके मददगारों का खात्मा करने के लिए इंटेलिजेंस ग्रिड को और मजबूत बनाया जाएगा। इसमें तकनीकी पदों पर नई भर्ती की जा रही है। केंद्रीय सुरक्षा बलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को बढ़ावा देने का विशेष प्रयास किया जा रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में विदेशी आतंकी संगठनों द्वारा सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को बरगलाया जा रहा है। आईएसआईएस और पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन अपना जाल फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।
भारत से लगती चीन सीमा पर चीन द्वारा बड़े पैमाने पर 'एआई' का इस्तेमाल किया जा रहा है। चीन की सेना इन्हीं उपकरणों के जरिए भारतीय सुरक्षा बलों से जुड़ा डाटा एकत्रित करती रहती है। चीन अपनी नई तकनीक में माइक्रो ड्रोन के अलावा रोबोट व दूसरे तरह के उपकरण शामिल कर रहा है। हालांकि इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय को रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर योजना बनानी पड़ती है। वजह, आईटीबीपी का नियंत्रण केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास है। साल 2022 व 23 के दौरान आईटीबीपी को नई बीओपी व वाहन प्रदान करने की योजना पर तेज गति से काम चल रहा है।
बॉर्डर एरिया, खासतौर पर एलओसी के साथ नए बंकर तैयार किए जा रहे हैं। भारत-पाक और भारत-बांग्लादेश सीमा पर सर्विलांस के लिए बीएसएफ ने स्थानीय तकनीक का इस्तेमाल किया है। इसके तहत बल को बड़ी आर्थिक मदद प्रदान की गई है। सीमावर्ती क्षेत्रों में एंटी टनल सोल्यूशन, आईईडी का पता लगाना व घनी धुंध में बॉर्डर की चौकसी के लिए उपकरण, इस तरह की तकनीक के लिए भी बीएसएफ को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राशि जारी की गई है। बीएसएफ ने अपने स्तर पर और स्वदेशी तकनीक के माध्यम से 'सर्विलांस' शुरू किया है। बीएसएफ ने देश में मौजूद सर्विलांस उपकरणों की मदद ली है। व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली, जिसे लगाने के काम में बहुराष्ट्रीय कंपनियां लगी हैं, इसकी बजाए बॉर्डर सर्विलांस के लिए अब कम खर्चीले एवं स्वदेशी उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ', जिसकी तैनाती आतंक एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में है, वहां पर खास तरह की बुलेटप्रूफ गाड़ियां उपलब्ध कराई जाएंगी। कश्मीर घाटी में बल के पास मौजूद अधिकांश वाहनों को बुलेट प्रूफ सिस्टम से लैस किया जा रहा है। 'बुलेटप्रूफ' वाहन पर 'एके-47' एवं दूसरे स्वचालित हथियारों से किए गए फायर का कोई असर नहीं होता। जवानों को लगभग 50 बुलेट प्रूफ प्लेट वाली नई बसें मुहैया कराई जाएंगी। बल के लिए पर्याप्त संख्या में माइनिंग प्रोटेक्टेड व्हीकल 'एमपीवी' की खरीद प्रक्रिया शुरू की गई है। केंद्रीय सुरक्षा बलों में शहीद होने वाले जवानों के परिवार को दी जाने वाली आर्थिक मदद को बढ़ाया गया है। जवानों को बुलेटप्रूफ जैकेट व नए हेलमेट प्रदान किए जा रहे हैं। नाइट विजन गॉगल्स, वाइजर, टॉर्च, हेडफोंस, वायरलेस कम्युनिकेशन डिवाइसेस और काउंटर वेट आदि सुविधा से लैस हेलमेट लेने के लिए खरीद प्रक्रिया शुरू हुई है।
बीएसएफ ने यूएवी का लो कॉस्ट सोल्यूशन तलाश लिया है। उच्च तकनीक से लैस सीसीटीवी कैमरे खरीदे गए हैं। ये कैमरे भी कई तरह के होते हैं। इसी तरह से बल द्वारा एंटी टनल सोल्यूशन तलाशा गया है। बॉर्डर पर आजकल जमीन से 30 फुट नीचे तक सुरंग खोदी जा रही है। इसका पता बाहर पड़ी खुदाई की मिट्टी से लग जाता है। उसके लिए खास किस्म का ड्रोन तैयार किया गया है। वह मिट्टी का रंग देखकर बता देता है कि वह मिट्टी सुरंग के भीतर से निकली है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के बजट में आंतरिक सुरक्षा के मद्देनजर एक बड़ी योजना पर काम किया जा रहा है। इसमें केंद्रीय एजेंसियों के अलावा विभिन्न राज्यों के पुलिस बलों के इंटेलिजेंस सेंटर भी शामिल हैं। इस साल के बजट से केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा विभिन्न बलों में आवास की समस्या को दूर करने पर खास ज़ोर दिया जाएगा। वजह, जवानों को सौ दिन की छुट्टी देने का मामला आवास की समस्या पर अटका है। आवास कम होने के कारण सभी जवानों को एक साल में उनके परिवार के साथ सौ दिन की छुट्टी देना सम्भव नहीं हो पा रहा है।