केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार (एक फरवरी) को केंद्रीय बजट 2022 में आयुष मंत्रालय के लिए 3050 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया। यह बजट शोध को बढ़ावा देने, किफायती आयुष सेवाओं का विस्तार करने, राज्यों के साथ मिलकर आयुष को बढ़ावा देने और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में आयुष के विशेष विकास पर बल देने के लिए आवंटित किया गया, जो पिछली बार करीब 2600 करोड़ था। इस बार पिछले बजट की तुलना में 400 करोड़ का इजाफा किया गया, जिससे आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को नया आयाम मिल सके।
केंद्रीय मंत्री ने आयुष मंत्रालय में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिये सबसे बड़ा बजट अलॉट किया है। बजट में अनुसंधान को कुल 682 करोड़ की सौगात दी गई। इसमें केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद को सबसे बड़ा बजट रिसर्च के लिए दिया गया। परिषद को 358.50 करोड़ का बजट आवंटित किया गया। वहीं, केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद को 143.70 करोड़ और केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद को 175.80 करोड़ दिए हैं। इस बजट से आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के वैधीकरण के लिये वैज्ञानिक अनुसंधान शुरू होंगे। इससे नई औषधियों की खोज, उनका सर्वेक्षण, उनकी रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा। इसके तहत औषधीय पादप अनुसंधान, चिकित्सा-नृजातीय वानस्पतिक सर्वेक्षण, औषधीय मानकीकरण और अनुसंधान के रिसर्च के पब्लिकेशन को नई दिशा मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री ने कोरोना महामारी को मात देने के लिए शुरू की गई आयुष मंत्रालय की स्कीमों और योजनाओं पर धनवर्षा की। इस बार आयुष मंत्रालय की परियोजनाओं और स्कीमों को 306 करोड़ का बजट अलॉट किया गया। दूसरा सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा फोकस मंत्रालय की लोक कल्याणकारी योजनाओं पर किया गया, जिससे आमजन को आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा का फायदा मिल सके। पिछली बार इसके लिए 235 करोड़ का बजट दिया गया था।
बजट में इस बार पूर्वोत्तर क्षेत्रों और राज्य सरकार को दी जाने वाली सहायता अनुदान धनराशि को करीब दो गुना कर दिया गया। पिछली बार पूर्वोत्तर क्षेत्र को 102.47 करोड़ दिए गए थे, जिसे बढ़ाकर 181.97 करोड़ कर दिया गया। वहीं, राज्य सरकारों को दी जाने वाली सहायता अनुदान धनराशि में बढ़ोतरी करते हुए 610 करोड़ कर दिया गया, जबकि पिछली बार यह धनराशि 422.40 करोड़ थी।
देश में विश्व के पहले डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन की स्थापना की जा रही है। पारंपरिक चिकित्सा के लिए यह दुनिया का पहला डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर होगा। इसका सीधा असर देश में ट्रेडिशनल मेडिसिन सेक्टर के निवेश में देखने को मिलेगा। इससे देश ग्लोबल सेंटर ट्रेडिशनल मेडिसिन से जुड़े ग्लोबल वेलनेस और रिसर्च के तौर पर उभरेगा। केंद्रीय बजट में इसके लिये भी पर्याप्त बजट का आवंटित किया गया है।
बजट में राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयुष अस्पतालों और औषधालयों के विस्तार के लिए 800 करोड़ रुपये अलॉट किए गए हैं, जिससे किफायती आयुष सुविधाएं लोगों को मिल सकें। साथ ही, अस्पतालों को अपग्रेड कर प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर किया जा सके।
सरकार ने इस बार आयुष्मान भारत के बजट में बढ़ोतरी नहीं की है। वर्ष 2020 में इस योजना पर 2680 करोड़ रुपये खर्च किए गए लेकिन साल 2021-22 में यह बजट करीब तीन गुना बढ़कर 6400 करोड़ तक पहुंच गया। हालांकि वर्ष 2022-23 के लिए सरकार ने आयुष्मान भारत के लिए 6412 करोड़ रुपये का बजट खर्च करने की योजना बनाई है। जानकारी मिली है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने संशोधित बजट में पिछले वर्ष 3199 रुपये खर्च किए थे।