राजनीतिक दलों के फंडिंग को लेकर बजट में बड़ा ऐलान किया गया है। बजट में सियासी दलों के चंदे को लेकर बड़ी चोट की गई है। अब राजनीतिक पार्टियां 2000 से ज्यादा कैश चंदे के रूप में नहीं ले सकती है। यानि ये कह सकते हैं ये बजट राजनीतिक पार्टियों के लिए बुरी है। क्योंकि पॉलिटिकल फंडिंग को लेकर देश भर के लोगों में गुस्सा था । हालांकि, इससे पहले चुनाव आयोग ने सरकार को ये सुझाव दिया था कि कैश में दो हजार से ज्यादा लेन-देन पर रोक लगाई जाए।
बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ऐलान किया कि अब सभी राजनीतिक पार्टियां एक व्यक्ति से कैश में सिर्फ 2000 रुपये तक ही ले सकती हैं। 2000 से ज्यादा के चंदे का हिसाब देना होगा, यानी राजनीतिक दल 2000 से अधिक चंदा ऑनलाइन या चेक के तौर पर ही ले सकते हैं। इससे पहले राजनीतिक दलों को अपनी आय में से 20 हजार से कम के चंदे को घोषित करने से छूट मिली हुई थी।
हालांकि, अभी भी राजनीतिक दल 20 हजार से कम चंदे का ब्योरा बताने के लिए बाध्य नहीं हैं। आरटीआई के दायरे में आने के बावजूद भाजपा, कांग्रेस, बसपा, एनसीपी, सीपीएम और सीपीआई कोई सूचना नहीं देते हैं। चुनाव जीतने वाले सांसदों और विधायकों के शपथ पत्रों की स्वत: जांच करने का कोई प्रावधान नहीं है।