16वीं कोर में वापस जा सकती है यूनिफॉर्म फोर्स
लद्दाख में तैनात सैन्य सूत्रों ने अमर उजाला को इस बात की पुष्टि की कि यूनिफॉर्म फोर्स को वापस जम्मू स्थित 16वीं कोर में भेजने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। उन्होंने बताया कि भारत और चीन लंबे समय से पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के संभावित समाधान को लेकर बातचीत कर रहे हैं, जिसमें भारतीय सेनाओं को एलएसी पर 2020 में गलवान हिंसा से पहले की स्थिति बहाल किए जाने को लेकर भी चर्चा चल रही है। जिसके तहत भारतीय सैनिक की पहुंच एलएसी पर कुछ पेट्रोलिंग पॉइंट तक या कुछ हिस्सों पर बनाए गए बफर जोन तक हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि यूनिफॉर्म फोर्स को अगले साल के मध्य तक वापस 16वीं कोर में भेजा जा सकता है, लेकिन इससे पहले लद्दाख में तैनात 14वीं कोर फायर एंड फ्यूरी में जरूरी पुनर्गठन किया जाएगा।
मई-जून 2025 तक पूरा होगा रिस्ट्रक्चरिंग का काम
सूत्रों ने बताया कि सेना जल्द ही 72 इनफैंट्री डिविजन को बढ़ाने की तैयारियों में जुटी है, जिसके मई-जून 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है। यह डिविजन पानागढ़ (पश्चिम बंगाल) स्थित 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर (MSC) के तहत काम करती थी, जिसे नॉर्दर्न कमांड में आने वाली 14 कोर के तहत पूर्वी लद्दाख में तैनात किया जा सकता है। जिसके बाद राष्ट्रीय राइफल्स की यूनिफॉर्म फोर्स (लगभग 18,000 जवानों के साथ) को 16 कोर में वापस भेज दिया जाएगा। बता दें कि स्ट्राइक कोर का इस्तेमाल दुश्मन के खिलाफ तेजी से हमला करने के लिए किया जाता है। फिलहाल सेना के पास चार स्ट्राइक कोर हैं। इनमें मथुरा स्थित 1 कोर, अंबाला स्थित 2 कोर, भोपाल स्थित 21 कोर और पानागढ़ में 17 एमएससी। सूत्रों का कहना है कि चीन से मिल रही चुनौती को देखते हुए 1 कोर और 17 कोर को हाल ही में एलएसी पर तैनात करने का फैसला किया गया था। इनमें से 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर (एमएससी) को उत्तर पूर्व और सिक्किम में तैनात किया गया है, जबकि 1 स्ट्राइक कोर को लद्दाख में सीमा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह स्ट्राइक कोर नॉर्दन कमांड के तहत 14 कोर में आती है, जिसका मुख्यालय निम्मू में है।
भीषण सर्दी में भी लद्दाख में तैनात रही यूनिफॉर्म फोर्स
सूत्रों ने बताया कि इनमें से 1 कोर पहले केवल पाकिस्तान की सीमा से लगे पश्चिमी क्षेत्र के लिए जिम्मेदार थी, लेकिन नए फैसले के तहत अब उसे चीन को काउंटर करने के लिए लद्दाख में तैनात किया गया है। इसी तरह, पानागढ़ स्थित 17 कोर, जो एकमात्र मौजूदा माउंटेन स्ट्राइक कोर है, उसे भी पूर्वोत्तर में तिब्बत-चीन सीमा पर तैनात किया गया है। हालांकि, 2021 तक केवल 17 एमएससी चीन पर केंद्रित रही और बाकी तीन कॉर्प्स का फोकस पाकिस्तान पर रहा। लेकिन 2020 में हुई गलवान हिंसा के बाद उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर फोकस करने के लिए 1 कोर व 17 कोर का पुनर्गठन किया गया। 2 इन्फैंट्री डिवीजनों के साथ चीन की उत्तरी सीमाओं पर नजर रखने के लिए 1 कोर की भूमिका बढ़ाई गई। वहीं, पूर्वी थिएटर पर ध्यान देने के लिए 17 कोर को एक अतिरिक्त डिवीजन दिया गया। इतना ही नहीं, चीन के साथ सैन्य गतिरोध के चलते 17 कोर के कुछ एसेट्स को पूर्वी लद्दाख में भी तैनात किया गया। वहीं पूर्वी लद्दाख में तैनाती के बाद से ही ये दोनों स्ट्राइक कोर हाई एल्टीट्यूड एरिया में नई वारफाइटिंग कंसेप्ट को डेवलप करने का काम कर रही हैं। गलवान में हुई हिंसा के बाद भारत ने एलएसी पर भयंकर सर्दियों में भी सैनिकों की तैनाती को बनाए रखा है।
यूनिफॉर्म फोर्स को फिर से जम्मू भेजने की हो रही थी मांग
वहीं जम्मू डिविजन में जिस तरह से आतंकी ताबड़तोड़ आतंकी वारदातों को अंजाम दे रहे थे, उसके बाद से रियासी क्षेत्र में यूनिफॉर्म फोर्स को फिर से तैनात किए जाने की मांग जोरशोर से की जा रही थी। भारतीय सेना की 16वीं कोर के तहत जम्मू में तीन अलग-अलग फोर्स थीं। इनमें रोमियो फोर्स जो रजौरी और सूरनकोट का इलाका देखती है। डेल्टा फोर्स डोडा और आसपास के इलाके देखती थी और यूनिफॉर्म फोर्स उधमपुर और आसपास के एरिया की जिम्मेदारी संभालती थी। सूत्रों ने बताया कि 15 साल से जम्मू में आतंकवाद के शांत होने और पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर जब तनाव शुरू होने के बाद जब चीन की तरफ से बॉर्डर पर भारी तैनाती होने लगी, तो एलएसी पर रिजर्व फोर्स यानी बैकअप को बढ़ाने की जरूरत महसूस की जाने लगी, जिसके बाद यूनिफॉर्म फोर्स को काउंटर टेररिजम की ड्यूटी से हटाकर एलएसी पर भेज दिया गया। जिसके बाद यूनिफॉर्म फोर्स मुख्यालय के साथ-साथ सेक्टर मुख्यालय और तीन बटालियनें भी वहां से चली गई थीं। तब यूनिफॉर्म फोर्स में करीब 9-10 बटालियनें थीं और बाकी को रोमियो और डेल्टा फोर्सेज में बांट दिया गया था। वहीं, इस फैसले के बाद यूनिफॉर्म फोर्स 14वीं कोर के तहत आ गई। रोमियो फोर्स से भी एक बटालियन को कम कर उसे एलएसी भेजा गया था। अभी भी आरआर की रोमियो फोर्स (राजौरी, पुंछ और रियासी) और डेल्टा फोर्स (डोडा, उधमपुर, रामवन और किश्तवाड़) उस क्षेत्र में तैनात हैं, जिनमें से प्रत्येक में लगभग 15,000 से 20000 जवान हैं। साथ ही जम्मू क्षेत्र में नियमित इनफैंट्री बटालियन भी तैनात है।
यूनिफॉर्म फोर्स की वापसी से मजबूत होगी HUMINT ग्रिड
सूत्रों ने बताया कि जम्मू क्षेत्र से राष्ट्रीय राइफल्स की यूनिफॉर्म फोर्स को लद्दाख भेजने के बाद इस इलाके में आतंकी वारदातों में एकाएक बढ़ोतरी हो गई। आतंकियों को इस इलाके में पकड़ बनाने का मौका मिला। उस इलाके में कश्मीर घाटी के मुकाबले HUMINT ग्रिड कमजोर हुई, क्योंकि घाटी पर ज्यादा फोकस किया गया। कश्मीर में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, मिलिट्री इंटेलिजेंस और अन्य खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट पर काम करती है, जिससे वहां आतंकियों की हिम्मत टूटी है। वहीं, काफी सालों तक शांत रहे जम्मू में HUMINT की बहुत उपेक्षा की गई। ह्यूमन इंटेलिजेंस के लिए सुरक्षा एजेंसियों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, नए सोर्स बनाने पड़ते हैं। लोगों में भरोसा पैदा करना पड़ता है। जम्मू इलाके में जिस तरह की भौगोलिक स्थितियां हैं और वहां जो काम सैनिक कर सकते हैं, वह काम तकनीक से नहीं हो सकता। वहीं, यूनिफॉर्म फोर्स की वापसी से उस इलाके में HUMINT ग्रिड फिर से मजबूत होगी और जम्मू रीजन में आतंकवाद पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।
75 फीसदी विवादों का हुआ निपटारा: जयशंकर
बता दें कि 12 सितंबर को स्विटजरलैंड के जिनेवा में सेंटर फॉर पॉलिसी सिक्योरिटी में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ चल रहे तनाव के 75 फीसदी विवादों का निपटारा कर लिया गया है। उन्होंने साफ कहा था कि रिश्ते तभी सामान्य हो सकते हैं, जब चीन अपने सैनिकों को पीछे खींचे और उन्हें वापस अपने ठिकानों पर भेजे। तब हमारे सैनिक भी अपने ठिकानों पर वापस लौट आएंगे। उन्होंने कहा था कि सीमा पर सेना गश्त कैसे करेगी, इसके बारे में हम दोनों के बीच एक समझौता है और चीन को इसका पालन करना होगा। विदेश मंत्री ने संकेत दिया था कि अगर विवादों का समाधान हो जाए, तो चीन के साथ रिश्ते फिर पहले जैसे हो सकते हैं और शांति और सौहार्द की फिर वापसी हो सकती है।
जल्द हो सकती है कमांडर स्तर की वार्ता
वहीं 12 सितंबर को ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में ब्रिक्स एनएसए की बैठक के दौरान बातचीत की थी, जहां उन्होंने सीमा विवाद को लेकर चर्चा की थी। विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया था कि डोभाल-वांग की बैठक के दौरान दोनों पक्षों को एलएसी पर बाकी मुद्दों के 'शीघ्र समाधान' खोजने को लेकर बातचीत हुई। एलएसी पर आखिरी डिसइंगेजमेंट सितंबर 2022 में हुआ था, जब दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख के गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स में पेट्रोलिंग पॉइंट-15 से सैनिकों को वापस बुला लिया था। अभी तक गतिरोध वाली जगहों गलवां घाटी, पैंगोंग त्सो के उत्तरी और दक्षिणी तट और गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स इलाके में बफर जोन का निर्माण किया गया। हालांकि अभी देपसांग प्लेंस और डेमचोक में अभी भी गतिरोध बरकरार है। देपसांग में चीनी सेना भारतीय सैनिकों को वाई जंक्शन इलाके में अपने पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक पहुंचने से रोक रही है। वहीं अब उम्मीद जताई जा रही है कि भारत और चीन के बीच कोर कमांडरों के बीच 22वें दौर की सैन्य वार्ता जल्द ही बुलाई जा सकती है।