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Uniform Civil Code: विपक्षी एकता को 'झटका', AAP ने समान नागरिक संहिता को दिया समर्थन

सार

Uniform Civil Code: आम आदमी पार्टी प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने अमर उजाला से कहा कि वे समान नागरिक संहिता के समर्थन में हैं। लेकिन इसे लाने के पहले देश के हर वर्ग और हर समुदाय से व्यापक बातचीत की जानी चाहिए और सबके हितों-परंपराओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए...
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Uniform Civil Code - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar
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विस्तार
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आम आदमी पार्टी ने समान नागरिक संहिता को अपना समर्थन दे दिया है। पार्टी ने कहा है कि समान नागरिक संहिता देश के लिए बेहद आवश्यक है और इसे लाने से सभी समुदायों को एक समान मंच पर लाने में सफलता मिलेगी। उसका यह कदम विपक्षी दलों की एकता के लिए तगड़ी चोट साबित हो सकता है।  

अरविंद केजरीवाल विपक्ष की अपनी पारंपरिक राजनीति से अलग स्टैंड लेने के लिए जाने जाते रहे हैं। इसके पहले भी उन्होंने राम मंदिर और संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के मुद्दे का समर्थन किया था। इसके लिए उन्हें विपक्ष के दूसरे दलों का कड़ा विरोध भी झेलना पड़ा था। लेकिन अपनी राजनीति की अलग पिच तय करते हुए अरविंद केजरीवाल ने इन मुद्दों का समर्थन किया था।

यह भी पढ़ें: Uniform Civil Code: समान नागरिक संहिता के समर्थन में आम आदमी पार्टी, कहा- सभी की सहमति से लागू हो यूसीसी

उमर अब्दुल्ला ने विपक्षी दलों की एकता बैठक के दौरान भी अरविंद केजरीवाल पर इसी बात पर हमला बोला था कि उन्होंने धारा 370 की समाप्ति पर इसे देशहित में लिया गया फैसला बताया था, लेकिन आज जब उनके खिलाफ दिल्ली अध्यादेश का मामला आ गया है तब वे सभी विपक्षी दलों से इसके खिलाफ समर्थन मांग रहे हैं। कथित तौर पर इसी कारण अरविंद केजरीवाल को विपक्षी दलों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया था।

केजरीवाल क्यों अपनाते हैं यह रणनीति

बड़ा प्रश्न है कि अरविंद केजरीवाल यह राजनीति क्यों अपनाते हैं। दरअसल, भाजपा एक रणनीति के तहत कांग्रेस पर तुष्टीकरण के आरोप लगाती रही है, लेकिन भाजपा की यही कोशिश आम आदमी पार्टी के संदर्भ में सफल नहीं हो पाई। भाजपा अरविंद केजरीवाल पर भी मुस्लिम तुष्टीकरण करने का आरोप लगाती रही है। इसी के तहत दिल्ली सरकार द्वारा सभी मौलवियों को हर महीने 25 हजार रुपये का वेतन देने और हिंदू-सिख धर्म के पुजारियों को कोई वेतनमान न देने का मामला भी वह जोरशोर से उठाती रही है। लेकिन इसके बाद भी अरविंद केजरीवाल पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप खास असर नहीं डाल सका है।

संभवतया इसका यह कारण रहा है कि अरविंद केजरीवाल दिवाली पर भगवान गणेश-लक्ष्मी की पूजा करते हुए दिखाई पड़ते हैं, तो छठ में यमुना पर पूजा करने भी पहुंच जाते हैं। हनुमान शोभा यात्राओं पर विरोध का आरोप लगने पर उनकी पार्टी के कार्यकर्ता गली-गली हनुमान चालीसा का पाठ करना शुरू कर देते हैं। जब मनीष सिसोदिया को जेल भी जाना पड़ता है तो वे अपने साथ गीता की पुस्तक लेकर जाते हैं।

आम आदमी पार्टी ने अपना चरित्र ऐसा बनाया हुआ है कि वह राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्र का साथ देती हुई नजर आती है, तो हिंदुत्व के मुद्दे पर लोगों को अयोध्या के दर्शन भी करवाती है। यही कारण है कि भाजपा उन पर हिंदू विरोधी होने का आरोप अब तक कारगर तरीके से साबित नहीं कर पाई है। चूंकि वे राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा और कांग्रेस दोनों का विकल्प बनने की कोशिश कर रहे हैं, इसके लिए वे एक साथ हिंदुत्व के पुरोधा, राष्ट्रीय गौरव की राजनीति के नायक और मुस्लिमों के हितैषी बनना चाहते हैं। चुनाव परिणाम और आम आदमी पार्टी का हर राज्यों में हो रहा विस्तार यह बताने के लिए पर्याप्त है कि उनका यह राजनीतिक दांव अब तक कारगर साबित हुआ है।  

सभी वर्गों से सलाह ले सरकार- AAP

आम आदमी पार्टी प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने अमर उजाला से कहा कि वे समान नागरिक संहिता के समर्थन में हैं। लेकिन इसे लाने के पहले देश के हर वर्ग और हर समुदाय से व्यापक बातचीत की जानी चाहिए और सबके हितों-परंपराओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे देश में अलग-अलग संप्रदाय के लोग रहते हैं और अनेक आदिवासी समुदायों की परंपरा हमसे बहुत अलग है। ऐसे में कोई कानून लाने से पहले सभी से विचार विमर्श करना आवश्यक है।

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