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UNICEF: यूनीसेफ ने टीकाकरण के लिए की भारत की तारीफ, कहा- कोविड के बाद भी बना रहा टीकों का महत्व

Thu, 20 Apr 2023 04:58 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ विवेक वीरेंद्र सिंह ने कहा, कोरोना महामारी के दौरान शून्य-खुराक वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 30 लाख हो जाने के बावजूद, भारत 2020 और 2021 के बीच शून्य-खुराक वाले बच्चों की संख्या को कम करके 27 लाख तक लाने में सक्षम हुआ। 
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कोरोना टीकाकरण (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूनिसेफ ने कोरोना टीकाकरण को लेकर भारत की तारीफ की है। यूनिसेफ के अनुसार, भारत 55 में से उन तीन देशों में से एक है जहां कोविड-19 महामारी के बाद भी टीकों के महत्व की धारणा बनी रही या उनमें सुधार हुआ। हालांकि, भारत दुनिया के उन देशों में भी शामिल है जहां कई बच्चों को कोरोना वैक्सीन की एक भी खुराक (शून्य-खुराक) नहीं दी गई। भारत में ऐसे बच्चों की संख्या 27 लाख है, जिन्हें एक भी नियमित टीका नहीं दिया गया है।

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यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ विवेक वीरेंद्र सिंह ने कहा, कोरोना महामारी के दौरान बिना खुराक वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 30 लाख हो जाने के बावजूद, भारत 2020 और 2021 के बीच शून्य-खुराक वाले बच्चों की संख्या को कम करके 27 लाख तक लाने में सक्षम हुआ। यह चौथा गहन मिशन इन्द्रधनुष (IMI) और व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के इसके निरंतर प्रावधान सहित सरकार द्वारा शुरू की गई अटूट राजनीतिक प्रतिबद्धता और निरंतर जागरूकता अभियान के कारण सक्षम हुआ।

यूनिसेफ ने टीकाकरण विषय पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट ‘दुनिया के बच्चों की स्थिति- 2023’ में कहा है कि कोविड-19 महामारी के दौरान 55 देशों में से 52 देशों में बच्चों के लिए टीकों के महत्व की सार्वजनिक धारणा में कमी आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रत्येक बच्चे के लिए टीकाकरण से पता चलता है कि महामारी की शुरुआत के बाद दक्षिण कोरिया, पापुआ न्यू गिनी, घाना, सेनेगल और जापान में बच्चों के लिए टीकों की महत्ता को लेकर धारणा में एक तिहाई से अधिक की कमी आई है।
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‘द वैक्सीन कॉन्फिडेंस प्रोजेक्ट’ द्वारा एकत्र और यूनिसेफ द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक चीन, भारत और मैक्सिको ही ऐसे देश थे, जहां आंकड़ों से संकेत मिला कि इन देशों में टीकों के महत्व की धारणा बनी रही या इसमें सुधार हुआ। यूनिसेफ ने कहा, अधिकांश देशों में 35 वर्ष से कम उम्र के पुरुषों और महिलाओं में महामारी की शुरुआत के बाद बच्चों के टीकों को लेकर विश्वास की कमी थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अध्ययन किए गए 55 देशों में से लगभग आधे देशों में 80 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने टीकों को बच्चों के लिए महत्वपूर्ण माना, इसके बावजूद बच्चों को टीके दिए जाने को लेकर कम विश्वास देखा गया। हालाकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि कई कारकों के मिलने से पता चलता है कि वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट का खतरा बढ़ रहा है। इन कारकों में महामारी की प्रतिक्रिया के बारे में अनिश्चितता, भ्रामक जानकारी तक बढ़ती पहुंच, विशेषज्ञता के विश्वास में कमी और राजनीतिक ध्रुवीकरण शामिल हैं।

यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने कहा, महामारी के चरम पर वैज्ञानिकों ने तेजी से ऐसे टीके विकसित किए जिन्होंने अनगिनत लोगों की जान बचाई। लेकिन इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बावजूद सभी प्रकार के टीकों को लेकर भय और गलत सूचना वायरस की तरह व्यापक रूप से प्रसारित हुई।

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