प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के 20 हजार पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया फंसी होने के कारण शिक्षकों की कमी बनी है। इन पदों के लिए कम से कम 15 लाख बेरोजगार बीएड अभ्यर्थी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। शिक्षकों की भर्ती नहीं होने से माध्यमिक विद्यालयों में प्रमुख विषयों की पढ़ाई ठप पड़ी है।
चयन बोर्ड की ओर से 2010 में शिक्षक भर्ती पूरी होने के बाद 2011 एवं 2013 में घोषित हुए शिक्षकों के रिक्त पदों को भरा नहीं जा सका है। अब 2016 में एक शिक्षक भर्ती फिर से घोषित कर दी गई। 2012 में प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद से माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती को लेकर लगातार उदासीनता सामने आई है।
2011 में घोषित शिक्षक पदों का सत्यापन नहीं होने के कारण कोर्ट ने इस भर्ती पर रोक लगा दी थी। चयन बोर्ड एवं शासन की ओर से ठीक ढंग से कोर्ट में पैरवी नहीं किए जाने से भर्ती पर लगी रोक नहीं हट सकी। ऐसे में चयन बोर्ड में 2013 में घोषित शिक्षक भर्ती के लिए 2015 में पहले परीक्षा करवा दी, रोक हटने के बाद चयन बोर्ड ने 2011 में घोषित शिक्षक भर्ती के लिए परीक्षा 2016 में पूरी करवाई। इस प्रकार यह भर्ती पांच वर्ष पीछे हो गई। चयन बोर्ड की ओर से 2016 में लगभग आठ हजार टीजीटी-पीजीटी केपदों की घोषणा की गई है। इसके लिए चयन प्रक्रिया का इंतजार है।