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Report: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में खुलासा, 22 फीसदी प्रवासी प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा

Sat, 17 Feb 2024 07:15 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जिन प्रवासी प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा बढ़ रहा है उनमें सीएमएस के तहत सूचीबद्ध न होने वाली 399 प्रजातियां भी शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से पक्षी और मछलियों की प्रजातियां  हैं।
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यूएन - फोटो : twitter
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रवासी प्रजातियों पर जारी पहली रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में प्रवासी प्रजातियां गंभीर चुनौतियां का सामना कर रहीं हैं। यदि सकारात्मक प्रयास नहीं किए गए तो 22 फीसदी प्रवासी प्रजातियां जल्द विलुप्त हो सकती हैं। यानी दुनिया की हर पांचवीं प्रवासी प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर है। इसके अलावा 44 फीसदी प्रवासी प्रजातियों की आबादी में गिरावट आ रही है, जबकि कुछ में वृद्धि भी देखने को मिली है। सबसे ज्यादा खतरा प्रवासी मछलियों पर है। इनकी 97 फीसदी प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा है।

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रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 30 वर्षों में सीएमएस में सूचीबद्ध 70 प्रवासी प्रजातियों के लिए खतरा कहीं ज्यादा बढ़ गया है। इनमें स्टेपी ईगल, मिस्र का गिद्ध और जंगली ऊंट शामिल हैं। इस दौरान केवल 14 प्रजातियों की स्थिति में सुधार हुआ है। इनमें नीली और हंपबैक व्हेल, सफेद पूंछ वाली समुद्री उकाब और काले चेहरे वाली स्पूनबिल शामिल हैं।

जिन प्रवासी प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा बढ़ रहा है उनमें सीएमएस के तहत सूचीबद्ध न होने वाली 399 प्रजातियां भी शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से पक्षी और मछलियों की प्रजातियां  हैं। सीएमएस संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण संधि है, जो प्रवासी जानवरों और उनके आवास के संरक्षण के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान   करती है। इसके तहत दुनियाभर की प्रवासी प्रजातियों को सूचीबद्ध किया गया है।
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इन्सानी गतिविधियां वजह
रिपोर्ट में इन्सानी गतिविधियों को इन प्रवासी प्रजातियों के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। इन्सानी गतिविधियों के कारण इनके आवासों को नुकसान हो रहा है। शिकार और मछली पकड़ना, कई प्रवासी प्रजातियों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है।

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