मंदिरों में चढ़ाए जाने वालों फूलों के एकत्र कर उन्हें रीसाइकिल कर गंगा को प्रदूषण से बचाने का कार्य करने वाले एक भारतीय स्टार्टअप को संयुक्त राष्ट्र द्वारा सम्मानित किया गया है। यह स्टार्टअप रोजाना हजारों टन फूल एकत्र करता है और उन्हें रीसाइकिल करता है।
संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेजों में इसे फ्लावरसाइकिलिंग नाम दिया गया है। इसकी प्रशंसा करते हुए कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में 'हेल्प अस ग्रीन' नामक स्टार्टअप मंदिरों से अपशिष्ट पदार्थों के समाधान के लिए एक नया व फायदेमंद समाधान है।
बता दें कि संगठन में करीब 1260 महिलाएं जुड़ी हुई हैं जिन्हें इस स्टार्टअप ने सहारा दिया है और उनके जीवन यापन का आधार बना है। इसके अलावा 19 बच्चे जिनकी माताएं कूड़ा साफ करने का काम करती हैं, उन्होंने स्कूल जाना शुरू कर दिया है।
यह स्टार्टअप उत्तर प्रदेश में रोजाना करीब 8.4 टन फूल एकत्र करता है। इन फूलों को रिसाइकिल कर इनसे चारकोल रहित अगरबत्तियां बनाई जाती हैं। इसके अलावा इस अपशिष्ट से ऑर्गेनिक वर्मीकम्पोस्ट व बायोडिग्रेबल पैकिंग का सामान तैयार किया जाता है।
इस भारतीय स्टार्टअप को 13 अन्य देशों के क्रांतिकारी स्टार्टअप्स के साथ यूनाइटेड नेशन क्लाइमेट एक्शन अवार्ड के विजेता के तौर पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को कातोविसे में आयोजित यूनाइटेड नेशन क्लाइमेट चेंज कांफ्रेंस के तहत किया गया था।
यूएन क्लाइमेट चेंज की कार्यकारी सचिव पैट्रीशिया एस्पिनोसा ने कहा कि इन गतिविधियों से स्पष्ट होता है कि जलवायु सुधार को लेकर कार्य करना न केवल संभव है बल्कि यह नया और रोमांचक भी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्य एक वास्तविक परिवर्तन लाते हैं।
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक अब तक इस भारतीय स्टार्टअप से जुड़ी महिलाओं ने 11,060 मीट्रिक टन फूलों को रीसाइकिल किया गया है। इससे जहां 110 मीट्रिक टन केमिकल कीटनाशक नदी में जाने से बचा वहीं 73 कूड़ा ढोने वाले परिवारों की आय भी बढ़ी। साथ ही 365 परिवारों के जीवन स्तर को बेहतर करने में भी इसने अहम भूमिका निभाई है।