विश्व निकाय के प्रमुख एंतोनियो गुटेरस ने भारत को स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई को लेकर भारत को सबसे बड़ा मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा, संसाधनों की स्वच्छता और जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने की दिशा में भारत एक वैश्विक महाशक्ति बन सकता है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा, कोरोना वायरस और जलवायु परिवर्तन ने पूरी दुनिया में बुनियादी सवाल उठाए हैं। ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान (टेरी) के एक वर्चुअल कार्यक्रम में गुटेरस ने कहा, भारत यदि जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल से नवीकरणीय उर्जा पर अपनी गति को तेज कर देता है, तो वह जलवायु परिवर्तन का मुकाबला कर पाने की दिशा में सही मायनों में वैश्विक महाशक्ति बन सकता है। भारत के लिए फोकस इसी पर था कि देश में बिजली उत्पादन के लिए जीवाश्म ईंधन का उपयोग करने वाले प्लांट्स के विकास को रोककर नवीकरणीय उर्जा के स्रोतों पर ध्यान दिया जाए। ऐसा करने से न सिर्फ ग्लोबल वॉर्मिग और प्रदूषण की समस्या से लड़ने में मदद मिलेगी बल्कि आर्थिक नजरिए से भी लाभ होगा। उन्होंने कहा, भारत आधुनिक उर्जा तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करके 2030 तक व्यवसाय का केंद्र बन सकता है।
भारत के पास अहम अवसर
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि आज युवा स्थायित्व, समानता और सामाजिक न्याय को लेकर साहसी कदम उठाने का ओर देख रहे हैं। उन्होंने कहा, स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण पर एक मजबूत नेतृत्व आज के वक्त की जरूरत है। मैं इसके लिए भारत को नेता बनने के लिए आह्वान करता हूं जो कि हमारी जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र स्थापना के 75वां साल समारोह में भारत के पास अहम भूमिका निभाने का मौका है।
कोयले में अधिक निवेश से अर्थव्यवस्था पर खतरा
नई दिल्ली। घातक वायु प्रदूषण और वैश्विक ताप वृद्धि के चलते बढ़ती आपदाओं का सामना कर रहे भारत को संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कोयले में अधिक निवेश से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले खतरे को लेकर चेताया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने नई दिल्ली स्थित पर्यावरण थिंक-टैंक द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट में एक वर्चुअल संबोधन में कहा कि भारत को महंगे जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता खत्म करनी चाहिए।