जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में अनुदान मांगों पर चर्चा के क्रम में सूबे की महबूबा मुफ्ती सरकार पर तीखे हमले किए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा और पीडीपी की सरकार ‘एजेंडा आप एलायंस’ पर नहीं बल्कि अजित डोभाल के डाक्टरीन पर काम कर रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल ने कश्मीर में हालात से निपटने के जिस सिद्धांत को पेश किया है, महबूबा सरकार उसी का पालन कर रही है। मुख्यमंत्री द्वारा स्थानीय आतंकियों को मुठभेड़ में नहीं मारने पर टिप्पणी करते हुए उमर ने पूछा कि सरकार के पास कौन सी तकनीक है जिससे वह पता लगाएगी कि घेरा गया आतंकी स्थानीय है या विदेशी।
उमर ने कहा कि अगर सरकार के पास वो तकनीक है तो उपमुख्यमंत्री ने क्यों कहा कि आतंकी बुरहान वानी गलती से मारा गया। महबूबा भी कहती रहीं हैं कि अगर सरकार को पता होता तो बुरहान वानी को मरने नहीं दिया जाता। क्या मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश देने से पहले यूनिफाइड कमांड में इसके बारे में चर्चा की? एक ओर ऐसी बातें होती हैं और दूसरी ओर बुरहान को मारने वालों को मेडल भी दिया जाता है। हालांकि, वह इस मुद्दे पर दोहरी बातें भी करती रहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कई जगह यह भी कहा कि वह आतंकी था और आतंकी मुठभेड़ में मारे ही जाते हैं। उमर ने कश्मीर हिंसा की न्यायिक जांच नहीं कराने के फैसले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महबूबा जब विपक्ष में थीं तब कहती थीं कि पुलिस अपने ही खिलाफ जांच करे तो भरोसा कैसे किया जा सकता है। अब उनका एक्शन पिछले स्टैंड से उलट है।