उमा भारती ने मिशन यूपी के लिए भाजपा में जारी चेहरे की रेस से खुद को अलग कर लिया
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केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने मिशन यूपी के लिए भाजपा में जारी चेहरे की रेस से खुद को अलग कर लिया है। भारती ने कहा कि उनका यूपी की सियासत से कुछ लेना-देना नहीं है। उमा ने कहा कि मैं भारती हूं, पूरे भारत की हूं। उन्होंने कहा कि यूपी की राजनीति में जाने का उनका कोई इरादा नहीं है। पीएम मोदी ने गंगा पुनरुद्धार का जो जिम्मा उन्हें दिया है अभी वे उसे पूरा करेंगी। उमा झांसी लोकसभा से चुनाव जीतकर संसद में पहुंची हैं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में वे सूबे की चरखारी सीट से चुनाव लड़ी थीं, जिसमें भारी मतों से उनकी जीत हुई।
लोध बिरादरी से होने की वजह से उमा की पिछड़े वर्ग में अच्छी पकड़ है। तो राम मंदिर आंदोलन से बनी फायरब्रांड की उनकी छवि के कारण उच्च जाति के लोग भी उनके कायल हैं। दरअसल असम चुनाव में सफलता मिलने के बाद भाजपा आलाकमान यूपी में चेहरा सामने कर विधानसभा चुनाव में उतरने पर विचार कर रहा है। इस प्रयास में सर्वे और संघ के जरिये चेहरे के नाम पर रायशुमारी जारी है। पार्टी के सामने जो चेहरे उभर कर आए हैं, उसमें उमा भी एक चेहरा हैं। पार्टी के अन्य केंद्रीय नेताओं में राजनाथ सिंह, वरुण गांधी और स्मृति ईरानी का चेहरा उमा पर भारी है।