उमा भारती के नमामि गंगा प्राधिकरण ने एक विवादित टवीट कर अपने ही सरकार की भद्द पिटवाई है। गंगा पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के ऐतिहासिक फैसले के ठीक एक दिन बाद शनिवार को नमामि गंगे की ओर से इंडस्ट्री के बचाव से जुड़ा। सवाल टवीटर पर डाला गया।
देर शाम सोशल मीडिया में बवाल कटने के बाद प्राधिकरण ने अपने टवीटर हैंडल से यह टवीट हटाया। तब तक मामला धमाल काट चूका था। शुक्रवार को गंगा स्वच्छता पर कडा फैसला लेते हुए राष्ट्रीय हरित प्रधिकरण ने गंगा में कूडा डालने वालों पर 50 हजार तक का हर्जाना लगाने का फरमान जारी किया है।
गंगा स्वच्छता के प्रयासों पर तमाम सवाल खडे करते हुए प्राधिकरण ने कहा है कि गंगा स्वच्छता में इंडस्ट्री ने भी सहयोग प्रदान नहीं किया। फैसले के अगले ही दिन नमामि गंगे प्राधिकरण ने अपने टवीटर अकाउंट पर एक पोस्ट डालते हुए जनता से सवाल पूछा कि क्या गंगा को प्रदुषित करने में सिर्फ इंडस्ट्री ही जिम्मेदार हैं।