उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के बातचीत विरोधी गुट ने असम सरकार को बाहरी भारतीयों के नाम पर चलने वाले शैक्षणिक संस्थानों के नाम बदल कर उनको असमिया नेताओं के नाम पर रखने की चेतावनी दी है। संगठन ने राज्य की भाजपा सरकार को इसके लिए छह महीने का वक्त दिया है।
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संगठन के स्वयंभू कमांडर-इन-चीफ परेश बरूआ ने ई-मेल के जरिए भेजे एक बयान में यह मांग उठाई है। इसमें कहा गया है कि राज्य के तमाम शैक्षणिक संस्थानों के नाम राज्य के प्रमुख नेताओं के नाम पर रखने होंगे। बरूआ ने कहा है कि ऐसा नहीं करने वाले संस्थानों को गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।
उल्फा ने नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्र नाथ टैगोर के नाम पर यहां एक विश्वविद्यालय के स्थापना पर भी सवाल उठाया है। उसने जनसंघ के नेता दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर 22 मॉडल कालेज खोलने के फैसले के लिए सरकार की खिंचाई की है। संगठन का कहना है कि सरकार का यह फैसला स्थानीय नेताओं का अपमान है।