सरकारी सेवाओं के लिए गेमचेंजर होगा स्मार्टफोन का आधार से जोड़ा जाना।
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आपका स्मार्टफोन देश की पब्लिक पॉलिसी का चेहरा बदल सकता है। यूआईडीएआई के प्रस्ताव को अमल में लाया गया तो आपका स्मार्टफोन उन सभी सरकारी सेवाओं का वन-स्टॉप इंस्ट्रूमेंट बन जाएगा, जो आधार को प्लेटफॉर्म बनाकर चल रही हैं।
यूनिक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सीईओ अजय भूषण पांडे ने बुधवार को स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इनमें ऐप्पल, सैमसंग, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और माइक्रोमैक्स के अधिकारी शामिल हुए। इनके साथ प्रोडक्ट सॉफ्टवेयर थिंक टैंक iSPIRT भी शामिल था। बैठक में मोबाइल फोन को आधार से जोड़ने के मसले पर चर्चा हुई।
पांडे ने बैठक के बाद बताया कि स्मार्टफोन कंपनियों का शुरुआती रुझान सकारात्मक है। उन्होंने इस आइडिया को आगे बढ़ाने से पहले अपने मुख्य अधिकारी से विचार करने की बात कही है।
यूआईडीएआई का विचार: आधार से जुड़ा चिप स्मार्टफोन में होगा और इससे यूआईडीएआई का एक पासवर्ड होगा। यह स्मार्टफोन आधार के सर्वर से जुड़ा होगा। पासवर्ड सूचना को लीक होने से रोकेगा। आधार का सर्वर फिंगरप्रिंट और रेटिना अथेंटिकेशन पर काम करेगा। हालांकि कुछ स्मार्टफोन में यह सुविधा पहले से ही आ रही है।
यूआईडीएआई का कहना है कि व्यक्ति की पहचान के रूप में यह गेमचेंजर हो सकता है। यूजर सुरक्षित तरीके से अपने मोबाइल पर ज्यादा से ज्यादा लेन देन कर सकता है।
इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक माइक्रोसॉफ्ट और माइक्रोमैक्स ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। सैमसंग इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि उनकी कंपनी एकमात्र फोन बनाने वाली कंपनी है जो आधार फ्रेंडली टेक्नोलॉजी का प्रयोग अपने हैंडसेट्स में करती है।