महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर दिए गए विवादित बयान देने के बाद राज्य में एक बार फिर से सियासी माहौल गरमा गया है। उद्धव ठाकरे ने एक बार फिर राज्यपाल केश्यारी को अमेजन पार्सल बताया है। साथ ही उन्होंने केंद्र से राज्यपाल कोश्यारी को वापस बुलाने की मांग की है। वहीं, दूसरी ओर शिवसेना, एनसीपी के नेताओं द्वारा राज्यपाल पर भाजपा नेता पर निशाना साधने के बाद अब भाजपा सांसद उदयनराजे भोंसले ने भी राज्यपाल और सुधांशू त्रिवेदी की आलोचना की और कार्रवाई की मांग की है।
शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने राज्यपाल कोश्यारी पर कसा तंज
शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने छत्रपति शिवाजी महाराज के खिलाफ राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की विवादित टिप्पणी को लेकर एक बार फिर तंज कसा। साथ ही उन्होंने केंद्र से उन्हें वापस बुलाने की मांग भी की। शिवसेना नेता ठाकरे ने कहा कि मैं केंद्र सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह अमेजन पार्सल वापस ले जो उन्होंने राज्यपाल के रूप में भेजा है।
हम केंद्र से आग्रह करते हैं कि वह एक राज्यपाल के रूप में भेजे गए नमूने को वापस बुलाए और उसे अन्य स्थानों पर या वृद्धाश्रम भेज दें। हम सभी महाराष्ट्र प्रेमियों से उनके बयान का विरोध करने के लिए कहते हैं। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान किया जा रहा है और सरकार खामोश बैठी है। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि सीएम कौन है? लेकिन जो शख्स दिल्ली के सहारे सत्ता में है, वो उनके खिलाफ क्या कहेगा।
सीएम शिंदे का उद्धव पर निशाना
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने बालासाहेब के हिंदुत्व के सिद्धांत को तोड़ा है, उन्हें हमारी आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है और उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम लेने का कोई अधिकार नहीं है, उनकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती। उद्धव ठाकरे हमें न सिखाएं।
भाजपा सांसद ने की राज्यपाल कोश्यारी और सुधांशू त्रिवेदी की आलोचना
जानकारी के मुताबिक, छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज और भारतीय जनता पार्टी के सांसद उदयनराजे भोसले ने गुरुवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और पार्टी सहयोगी सुधांशु त्रिवेदी की शिवाजी महराज के बारे में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए आलोचना की। इससे पहले मंगलवार को उन्होंने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर कोश्यारी और त्रिवेदी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
उन्होंने आज कहा कि 20 नवंबर को औरंगाबाद में कार्यक्रम के दौरान जब राज्यपाल कोश्यारी ने शिवाजी महाराज के बारे में बयान दिया तो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार मंच पर थे। ऐसे में केंद्रीय मंत्री गडकरी और शरद पवार को राज्यपाल की टिप्पणी पर उसी समय आपत्ति जतानी चाहिए थी। उन्होंने यह भी कहा कि जब मैंने छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में राज्यपाल का बयान सुना, तो मैं समझ नहीं पाया कि इस तरह के बयान का आधार क्या है। दरअसल, एक दिन पहले कोश्यारी ने कहा कि शिवाजी महाराज अब एक पुराने आदर्श बन गए हैं, अब आप बाबासाहेब अंबेडकर से लेकर नितिन गडकरी को नए आदर्श बना सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत की अवधारणा छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा रखी गई थी। वे भगत सिंह, क्रांतिसिंह नाना पाटिल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, छत्रपति शाहू महाराज, महात्मा ज्योतिबा फुले और डॉ अंबेडकर जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के प्रेरणास्रोत थे। और अब ये लोग कहते हैं शिवाजी महाराज के विचार पुराने हो गए हैं।
सुधांशू त्रिवेदी ने दिया था ये बयान
वहीं, भाजपा नेता सुधांशू त्रिवेदी ने कथित तौर पर कहा था कि शिवाजी महाराज ने मुगल सम्राट औरंगजेब से माफी मांगी थी। जिसके कारण उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, भाजपा नेता सुधांशू त्रिवेदी की आलोचना करते हुए भोंसले ने कहा कि जब देश में हर कोई मुगल शासन के सामने नम्रता से झुक गया, केवल शिवाजी महाराज उनके खिलाफ खड़े हुए। जब इस तरह के बयान दिए जाते हैं तो क्या उन्हें खुद पर शर्म नहीं आती? वे किस आधार पर इस तरह के बयान दे रहे हैं? इस तरह के बयान हमें गुस्सा दिलाते हैं।
नहीं छोड़ा जा सकता शिवाजी महाराज की विचारधारा को
भाजपा नेता ने कहा कि अगर भारत को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में अपना दर्जा बरकरार रखना है तो शिवाजी महाराज की विचारधारा और विचारों को नहीं छोड़ा जा सकता है। भाजपा सांसद भोसले ने कहा कि उन्हें यकीन था कि रायगढ़ किले (शिवाजी महाराज की राजधानी) का दौरा करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन बयानों पर गौर करेंगे। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री से भी मुलाकात करेंगे।
भोसले ने जोर देकर कहा कि पार्टी चाहे कोई भी हो, उन्हें अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए और दोनों को हटाना चाहिए। राज्यपाल का पद एक सम्मानजनक पद है। अगर वह इस जिम्मेदारी को नहीं समझते हैं, तो उन्हें उस कुर्सी पर बैठने का अधिकार नहीं है।