उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम घोषित होने के बाद 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट को लेकर मचे सियासी कोहराम के बीच आज विपक्ष ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया। विपक्ष ने चुनाव आयोग से गुहार लगाई कि आम बजट 8 मार्च को पांचों राज्यों में विधानसा चुनाव संपन्न होने के बाद पेश हो।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि, 'चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार वोटरों को रिझाने के लिए लोक-लुभावन बजट ला सकती है। निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए यह जरुरी है कि सरकार को तय वक्त से पहले बजट लाने से पहले रोका जाए।'
इससे पहले कांग्रेस समेत कई दल चुनाव से ठीक पहले आम बजट पेश करने पर आपत्ति जताते हुए राष्ट्रपति भवन का दरवाजा खटखटा चुके हैं। चुनाव आयोग से मिलने वाली विपक्षी पार्टियों में तृणमूल कांग्रेस, बसपा, जेडीयू, आरजेडी, कांग्रेस शामिल हैं। हालांकि इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने विपक्ष की आम बजट की तारीख टालने संबंधी मांग पर विचार विमर्श के बाद फैसला लेने की बात कही थी।
वहीं भाजपा के साथ हर मुद्दे पर टकराव की भूमिका निभाने वाली शिवसेना ने अब एक फरवरी को संसद में पेश होने वाले बजट को लेकर खुला विरोध किया है। उद्धव ठाकरे ने बुधवार को कहा कि पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा हो चुकी है इसलिए चुनाव के दौरान संसद में आम बजट प्रस्ताव नहीं पेश किया जाना चाहिए, क्योंकि सत्ताधारी दल इसका फायदा ले सकते हैं।
इसलिए राष्ट्रपति से अपील है कि वे विशेषाधिकार का उपयोग करें। उद्धव ने कहा कि आम बजट प्रस्ताव में लोक लुभावन योजनाएं घोषित की जाती हैं। इससे आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होगा। इस तरह की योजनाएं बजट प्रस्ताव में घोषित होने से विपक्षी पार्टियों को चुनाव में नुकसान हो सकता है जबकि सत्ताधारी दल इसका फायदा उठा सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि केंद्रीय बजट पांच राज्यों के चुनाव संपन्न होने के बाद पेश किया जाए।