उद्धव ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी छत्रपति शिवाजी महाराज और समाज सुधारक ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले जैसी श्रद्धेय शख्सियतों का अपमान कर रहे हैं। ऐसे लोग फिर भी पद पर बने हुए हैं।
कई राज्य सरकारों और राज्यपाल के बीच चल रहा कोल्ड वार थमने का नाम नहीं रहा है। कभी तमिलनाडु से राज्यपाल हटाने की मांग उठती है तो कभी केरल राज्यपाल की मंशा पर सवाल खड़े करता है। वहीं अब इस कड़ी में महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने शनिवार को कहा कि राज्य के राज्यपालों के पद के लिए व्यक्तियों के चयन के लिए कुछ मानदंड तय किए जाने चाहिए।
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उद्धव ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी छत्रपति शिवाजी महाराज और समाज सुधारक ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले जैसी श्रद्धेय शख्सियतों का अपमान कर रहे हैं। ऐसे लोग फिर भी पद पर बने हुए हैं।
ठाकरे ने कहा कि राज्यपाल भारत के राष्ट्रपति का प्रतिनिधि होता है और ऐसे पद पर किसे नियुक्त किया जा सकता है, इसके लिए कुछ मानदंड होने चाहिए। मैं मांग करता हूं कि इस तरह के नियम बनाए जाएं। ताकि सही व्यक्ति इस गद्दी पर बैठ सके। वहीं महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच सीमा रेखा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अपने समकक्ष बसवराज बोम्मई के बयान पर मौन थे कि यहां के मंत्रियों का बेलगाम में स्वागत नहीं किया गया था।
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ठाकरे ने कहा कि बोम्मई ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के मंत्रियों चंद्रकांत पाटिल और शंभूराज देसाई की बेलगावी की प्रस्तावित यात्रा पर आपत्ति जताई थी। आगे कहा कि शिंदे और उनके विधायकों को बेलगाम और कर्नाटक के अन्य मराठी भाषी क्षेत्रों को महाराष्ट्र में लाने के लिए कामाख्या देवी से प्रार्थना करने के लिए गुवाहाटी (असम) जाना चाहिए था।
उद्धव ने मुंबई की आरे कॉलोनी में मेट्रो रेल कारशेड को लेकर चल रहे विवाद पर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह सुविधा कांजुरमार्ग में बन सकती थी लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। साथ ही उन्होंने कहा कि कोई ये न समझे कि पार्टी कमजोर हो गई है, बल्कि हर बीतते दिन के साथ मजबूत होती जा रही है।