महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार शनिवार को अपना एक वर्ष पूरा करने जा रही है। इस सरकार की स्थिरता को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे थे। अटकलें थी कि ठाकरे सरकार अपना एक साल पूरा नहीं कर पाएगी। लेकिन भाजपा की तमाम कोशिशों के बावजूद उद्धव ठाकरे की सत्ता पर पकड़ मजबूत बनी रही। ठाकरे और पवार की जोड़ी ने बेमेल गठबंधन की सरकार चलाने का यह कमाल कर दिखाया।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि महाराष्ट्र में तीन दलों की महाविकास आघाड़ी सरकार के एक साल का कार्यकाल पूरा करने श्रेय मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और एनसीपी सुप्रीमों शरद पवार को जाता है। हालांकि शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस के गठबंधन वाली इस सरकार में मनमुटाव की खबरे भी चर्चा में रही हैं।
कोरोना महामारी के बीच प्राकृतिक आपदाओं ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें
देश में महाराष्ट्र कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य रहा। यहां 18 लाख से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हुए और 46 हजार 800 से ज्यादा लोगों की मौतें हुई। इस बीच प्राकृतिक आपदाएं जैसे चक्रवात निसर्ग, पूर्व विदर्भ, मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बाढ़ आदि घटनाओं ने ठाकरे सरकार के सामने कड़ी चुनौतियां पेश की।
पालघर में साधुओं की हत्या और सुशांत सिंह की मौत बनी गले की हड्डी
पालघर में दो साधुओं की पीट-पीटकर हत्या और अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला उद्धव ठाकरे के गले की हड्डी बन गई। उनके बेटे पर्यावरण मंत्री आदित्य का नाम सुशांत सिंह आत्महत्या मामले में सामने आया। आदित्य को सुशांत मामले में खींचने की कोशिशें भी हुई।
वहीं, आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में पत्रकार अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार किए जाने और अभिनेत्री कंगना रनौत के बांद्रा स्थित बंगले के कुछ हिस्से को शिवसेना नीत बीएमसी द्वारा ढहाए जाने के मामले में ठाकरे को मुंह की खानी पड़ी।