एक तरफ समान नागरिक संहिता पर उत्तराखंड सरकार की ओर से गठित जस्टिस रंजना देसाई कमेटी की रिपोर्ट तैयार है, तो दूसरी तरफ विधि आयोग ने भी अचानक सभी हितधारकों से इस मामले में सुझाव मांगा है। दरअसल, ऐसा केंद्र सरकार की समान नागरिक संहिता को पूरे देश में लागू करने की मंशा के तहत किया गया है। केंद्र सरकार जस्टिस देसाई कमेटी की रिपोर्ट को मंजूरी मिलने का इंतजार किए बिना इसको पूरे देश में लागू करने के लिए इससे जुड़ी प्रक्रिया पूरी करना चाहती है, जिससे इसे जरूरत के समय लागू करने में देरी न हो।
बेहद सीमित वर्ग विरोध में
हमारा कार्यक्षेत्र उत्तराखंड था। हालांकि, ड्राफ्ट तैयार करते समय कमेटी ने सभी पहलुओं का ध्यान रखा है। लैंगिक समानता, महिलाओं, बच्चों, दिव्यांगों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के साथ-साथ आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक और जातिगत असमानता को खत्म करने पर विचार किया है। समान नागरिक संहिता के विरोध में बेहद सीमित वर्ग थे। ऐसे में मुझे उम्मीद है कि मसौदे का सभी पक्ष स्वागत करेंगे। -जस्टिस रंजना देसाई, विशेष कमेटी की प्रमुख
रिपोर्ट को तत्काल स्वीकार करेगी उत्तराखंड सरकार
समान नागरिक संहिता लागू करने में समस्या न हो, इसके लिए भाजपा नेतृत्व ने उत्तराखंड की धामी सरकार को जस्टिस देसाई कमेटी की रिपोर्ट को तत्काल स्वीकार कर इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। कमेटी इसी महीने के अंत तक सरकार को मसौदा सौंपेगी। ऐसे में धामी सरकार नए महीने के पहले सप्ताह में इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर देगी। बता दें कि इसे लागू करने का वादा मध्य प्रदेश और गुजरात सरकार ने भी किया है।
अदालती सुनवाई के बीच भी जारी रहेगी प्रक्रिया
सरकार की निगाहें अब जस्टिस देसाई कमेटी की रिपोर्ट पेश होने के बाद की परिस्थितियों पर हंै। इस रिपोर्ट पर सरकार खासतौर से न्यायपालिका के रुख को भी भांपना चाहती है। हालांकि, सरकार के सूत्रों का कहना है कि अगर रिपोर्ट को अदालत में चुनौती दी गई तो अदालत की सुनवाई प्रक्रिया के दौरान भी सरकार यूसीसी से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने का सिलसिला जारी रखेगी। वहीं, सरकार को यूसीसी पर न्यायपालिका का समर्थन मिलने का पूरा भरोसा है।