पश्चिम बंगाल के राजेश सरकार और तपस वर्मन का अपराध मात्र इतना था कि उन्होंने अपने लिए गणित और विज्ञान के शिक्षकों की मांग की थी। बार-बार की मांग के बाद भी जब शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई तो छात्रों ने मैनेजमेंट के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन को रोकने के लिए प. बंगाल पुलिस ने पहले तो लाठी चार्ज किया, आंसू गैस छोड़े और अंत में गोली चला दी जिसमें दोनों छात्रों की मौत हो गई। अब दोनों छात्रों के मां-बाप अपने बच्चों का पोस्ट मॉर्टम कराने के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक उत्तरी दिनाजपुर के दारीविट क्षेत्र में लगभग 2000 छात्रों का एक स्कूल है। यहां शिक्षकों की भारी कमी है और कई बार क्लर्क ग्रेड कर्मचारी उन्हें पढ़ाते हैं। बच्चों की मांग थी कि उन्हें गणित और विज्ञान के शिक्षक दिये जाएं। स्कूल प्रबंधन ने एक टीचर की नियुक्ति की जो उन्हें उर्दू भाषा में पढ़ाते थे। छात्रों ने अपने लिए बांग्लाभाषा में शिक्षक की नियुक्ति की मांग की। प्रबंधन ने इसके लिए हामी भरी। लेकिन बच्चों से वायदे के बाद भी मांग पूरी नहीं की, जिसके बाद छात्र प्रदर्शन पर उतर आए। प्रदर्शन के दौरान उनकी मौत हो गई।
एबीवीपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता मोनिका चौधरी ने अमर उजाला को बताया कि जब हमने उनके क्षेत्र का दौरा किया तो पता चला कि मासूम बच्चों को अपने शिक्षा के अधिकार के लिए जान देनी पड़ी है। पश्चिम बंगाल पुलिस जांच के नाम पर गांव वालों को परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों के माता-पिता अब मामले की सीबीआई जांच और उनका पोस्ट मार्टम कराने के लिए भटक रहे हैं जिससे दोषियों को सजा दी जा सके।