Gujarat Poisonous Liquor: गुजरात में जहरीली शराब कांड में गृह विभाग ने शनिवार को दो पुलिस अधीक्षकों को मामले की निगरानी का जिम्मा सौंपा है। जहरीली शराब कांड में 42 लोगों की जान चली गई थी। दर्जनभर मौत के बाद बोटाद जिले के बरवाला और रानपुर पुलिस थानों में और अहमदाबाद जिले के धंधुका पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, बोटाद जिले में दर्ज दो प्राथमिकी का पर्यवेक्षण एसपी (राज्य निगरानी प्रकोष्ठ) निर्लिप्त राय को सौंप दिया गया है, और अहमदाबाद (ग्रामीण) पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के एसपी ज्योति पंकज पटेल को सौंपी गई है।
गृह विभाग ने कहा कि पुलिस महानिदेशक आशीष भाटिया ने मामले में निष्पक्ष और विवेकपूर्ण जांच सुनिश्चित करने के लिए प्राथमिकी की निगरानी के लिए दो अधिकारियों को नियुक्त किया है। शराब बनाने के लिए केमिकल लेने वाले और शराब बेचने वाले समेत 15 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
हादसे के बाद बोटाद और अहमदाबाद के एसपी का तबादला कर दिया गया था और छह पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। पुलिस ने कहा कि बोटाद जिले में कुछ छोटे समय के बूटलेगर्स ने मिथाइल अल्कोहल या मेथनॉल, एक अत्यधिक जहरीला औद्योगिक विलायक के साथ पानी मिलाकर शराब बनाई और इसे 20 रुपये प्रति पाउच में बेच दिया। बोटाद और पड़ोसी अहमदाबाद जिले के कम से कम 42 लोगों की 25 जुलाई को जहरीली शराब पीने से मौत हो गई थी।
ड्रोन के इस्तेमाल से पकड़ी शराब की अवैध फैक्ट्रियां
एसपी (ग्रामीण सूरत) हितेश जोयसारी ने बताया कि हम गुजरात के उन इलाकों में अवैध शराब बनाने वाली फैक्ट्रियों की निगरानी के लिए पिछले चार दिनों से ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जहां पुलिस का पहुंचना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि इस दौरान अब तक 20 स्थानों पर 40 से अधिक अवैध शराब संयंत्रों की पहचान की गई और उन्हें नष्ट किया गया है। वहीं आठ लोगों को गिरफ्तार भी किया है।