मुंबई में सात किलो प्राकृतिक यूरेनियम के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किए जाने के मामले की जांच एनआईए ने अपने हाथ में ले ली। महाराष्ट्र एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (एटीएस) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए परमाणु बम जैसा घातक विस्फोटक बनाने के काम आने वाले सात किलो यूरेनियम के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 21.30 करोड़ रुपये है।
एनआईए ने शनिवार को इस अहम मामले की जांच अपने हाथ में ली। इससे पहले पांच मई को महाराष्ट्र एटीएस ने मुंबई से जिगर जयेश पांड्या व अबू ताहिर को गिरफ्तार कर उनके पास से 7.1 किलो यूरेनियम जब्त किया था।
बार्क ने की यूरेनियम की पुष्टि, आरोपी रिमांड पर
भाभा परमाणु रिसर्च सेंटर (बीएआरसी) से इसकी पुष्टि होने के बाद बृहस्पतिवार को दोनों आरोपियों के खिलाफ परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 के तहत मामला पंजीकृत कर कोर्ट में पेश किया गया जहां से उन्हें 12 मई तक पुलिस रिमांड पर सौंपा गया है।
जिगर पांड्या यूरेनियम बेचने की तलाश में था
एटीएस की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि यूरेनियम बेचने की जानकारी 14 फरवरी को पुलिस इंस्पेक्टर संतोष भालेराव को मिली थी। एक विश्वसनीय सूत्र ने उन्हें बताया था कि जिगर पांड्या नामक शख्स अवैध रूप से यूरेनियम बेचने के लिए ग्राहक की तलाश में है।
इस सूचना के बाद इंस्पेक्टर भालेराव और दक्षिण मुंबई के नागपाड़ा यूनिट की पुलिस ने ठाणे निवासी पांड्या को गिरफ्तार कर लिया। पांड्या से पूछताछ के बाद पता चला कि यूरेनियम के ये टुकड़े अबू ताहिर नामक व्यक्ति ने दिए थे।
इसके बाद पुलिस ने मानखुर्द से अबू ताहिर अफजल चौधरी को भी गिरफ्तार कर लिया। अबू ताहिर की निशानदेही पर कुर्ला एटीएस की टीम ने प्राकृतिक यूरेनियम बरामद करने के बाद उसे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) में जांच के लिए भेजा था। वैज्ञानिकों की जांच में प्राकृतिक यूरेनियम होने की पुष्टि की गई है। जांच के दौरान पता चला कि जब्त यूरेनियम की शुद्धता 90 प्रतिशत से अधिक है।
एक अन्य अधिकारी ने पहले कहा था कि जब्त यूरेनियम को विश्लेषण के लिए ट्रॉम्बे स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) भेजा गया था और अनुसंधान केंद्र से प्राप्त रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पदार्थ प्राकृतिक यूरेनियम है, जो अत्यधिक रेडियोधर्मी और मानव जीवन के लिए खतरनाक है।