तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कहा है कि संसदीय समितियों की बैठक की जरूरत है ताकि जनहित के मुद्दों पर समय से उठाए जा सकें और उन पर चर्चा की जा सके, खासकर कोविड के समय में। इसके साथ ही टीएमसी ने राज्यसभा चेयरमैन को पत्र लिखते हुए अनुरोध किया है कि संसदीय समितियों की बैठक वर्चुअल (आभासी) माध्यम से आयोजित करवाई जाए।
राज्यसभा सदस्य और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा, ‘भारत में पिछले दो हफ्तों में हर दिन कोविड के तीन लाख से अधिक मामले आए हैं। मैं संसदीय समितियों की बैठकें डिजिटल तरीके से कराने के हमारे अनुरोध पर विचार करने का आग्रह करता हूं। इनमें विभाग संबंधी स्थायी, परामर्शक और चयन समितियों की बैठकें शामिल हैं।’
उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी को अध्यक्ष के कार्यालय से 27 अगस्त को लिखा एक पत्र मिला था जिसमें कहा गया था कि यह फैसला लिया गया है कि संसदीय समितियों की डिजिटल बैठक कराने से संबंधित मामला दोनों सदनों में नियमों पर समितियों को भेजा जा सकता है।
ब्रायन ने कहा, ‘मैं उन फैसलों के बारे में बताने का अनुरोध करता हूं, जिसे दोनों सदनों के नियमों पर समितियों ने लिया हो। मैं फिर आपसे संसदीय समितियों को डिजिटल तरीके से काम करने देने का अनुरोध करता हूं ताकि लोक महत्व के मुद्दे समय पर उठाए जा सकें और उन पर चर्चा की जा सके, खासतौर से देश में गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए।’
कांग्रेस ने भी उठाई मांग
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभापति एम वेंकैया नायडू से संसद की स्थायी समितियों की बैठक डिजिटल माध्यम से कराने की अनुमति देने का आग्रह करते हुए कहा है कि लोगों की बदहाली पर संसद मूकदर्शक बने हुए नहीं रह सकती।
राज्यसभा के सभापति को एक पत्र में खड़गे ने उनसे हस्तक्षेप करने की मांग की है और कहा है कि संसदीय समितियां इस महामारी से निपटने और लोगों को राहत प्रदान करने के मौजूदा कदमों में योगदान दे सकती है।
खड़गे ने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत की संसद मूकदर्शक बने हुए नहीं रह सकती और ना ही उसे ऐसा करना चाहिए। लोगों के साथ एकजुटता का संदेश देना होगा ताकि उनकी पीड़ा कम हो और एकता दिखे।
कांग्रेस नेता ने कहा कि स्थायी समितियों से संबंधित विभाग संसद का प्रभावी, निष्पक्ष तंत्र है और समितियों में सामूहिक मंथन की परंपरा संसदीय व्यवस्था की शानदार उपलब्धियां हैं।