संशोधित जुवेनाइल जस्टिस कानून के तहत देश में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी किशोर को उम्रकैद की सजा दी गई। मंगलवार को झाबुआ के 2 किशोरों को एक किशोर की हत्या के जुर्म में उम्र कैद की सजा सुनाई गई।
आपको बताते चलें कि पीड़ित राधु नाना पालिया को बीते साल 5 दिसंबर को केवल 500 रुपए के लिए छुरा घोंप दिया था। उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन उसकी मौत हो गई।
पालिया की मौत के लिए जिम्मेदार 2 किशोर की पहचान की गई जिनकी उम्र 16 और 17 साल थी। उन्हें सुधारगृह भेज दिया गया था, लेकिन जब उनका परीक्षण किया गया तो शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ पाए गए और उन्हें ये समझ थी कि वो कितनी भयानक वारदात को अंजाम दे रहे हैं।
झाबुआ के पुलिस अधीक्षक महेश चंद्र जैन ने बताया कि इस मामले को एडिशनल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के सामने पेश किया गया। जहां न्यायाधीश ए.ए खान ने जुवेनाइल जस्टिस की आईपीसी धारा 302, 15 और 16 के तहत दोनों किशोरों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि 'ये एक जघन्य अपराध है लेकिन दुर्लभतम केस न होने की वजह से हमने इस मामले में मृत्युदंड की सजा की मांग नहीं की'। ये ऐसा पहला मामला है जब किसी किशोर को गंभीर अपराध करने के लिए वयस्क अपराधी की तरह सजा दी गई है।