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दिनभर सुर्खियों में रहे महिलाओं से जुड़े दो मुद्दे: अकबर का इस्तीफा और औरतों पर लाठीचार्ज 

Wed, 17 Oct 2018 07:31 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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MJ Akbar, Sabrimala
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दुर्गाष्ठमी यानी 17 अक्तूबर का दिन कई मायनों में याद रखा जाएगा। एक तरफ तो पूरा देश मां भगवती की अष्ठमी पूजा में तल्लीन था, तो दूसरी ओर महिलाओं से जुड़े दो मुद्दे सुर्खियों में रहे। पहला मामला था केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर तो दूसरा मामला राजनीतिक था, लेकिन उसके केंद्र में भी स्त्रीशक्ति थी।

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दरअसल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दुर्गाष्ठमी को सबरीमाला अय्यप्पा मंदिर के कपाट खोले गए। हजारों की तादाद में महिलाएं दर्शन के लिए कतारबद्ध थीं। वहीं उन्हें रोकने वालों की फौज भी कम नहीं थी। महिलाओं को रोकने में महिलाएं भी पीछे नहीं थीं।

दोपहर बाद #MeToo अभियान का असर दिखाई दिया और केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि उनके त्यागपत्र का कयास पिछले एक सप्ताह से लगाया जा रहा था। डेढ़ दर्जन से अधिक महिलाओं ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। यह सब हुआ #MeToo के जरिये। यह एक विश्वव्यापी अभियान है जिसके तहत महिलाएं अपने साथ हुए अशालीन, अशोभनीय उत्पीड़न का खुलासा कर रही हैं। आइए, आपको बताते हैं कि आखिर क्या है पूरा वाकया।
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पहला मामला

पहले मामला में भारी विरोध प्रदर्शन के बीच सबरीमाला मंदिर के कपाट खोल दिए गए हैं। इस दौरान पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करनी पड़ी। लाठीचार्ज के दौरान कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल भी हो गए। जबकि कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। कपाट खुलने के बाद पारंपरिक तरीके से पूजा और आरती की गई है। भक्त आज साढ़े दस बजे तक भगवान अयप्पा के दर्शन करेंगे।
 
बता दें कि सबरीमाला मंदिर में रजस्वला लड़कियों और महिलाओं के प्रवेश का महिलाएं ही विरोध कर रही हैं। इसको लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया है, जिसको देखते हुए प्रशासन ने भी पूरी तैयारी की हुई है। मंदिर के आसपास के इलाकों में भारी सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। सबरीमाला मंदिर जाने वाले रास्ते पर लाठी चार्ज किया गया है। वहीं प्रदर्शनकारियों ने पत्रकारों पर भी हमला कर दिया है। जिसके बाद पुलिस पत्रकारों को अपनी गाड़ी से सुरक्षित स्थान पर ले गई है।  

मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे अब तक करीब 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मंगलवार को 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि आज (बुधवार) 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी पम्बा में हुई है। हालांकि इनमें से दो लोगों को बेल भी मिल गई है।

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दूसरा मामला

वहीं दूसरे मामले में विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन पर मीटू अभियान के तहत एक दर्जन से ज्यादा महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। जिसके चलते विपक्ष लगातार उनपर दवाब बना रहा था। भाजपा सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में पहली बार किसी मंत्री ने इस्तीफा दिया है। हालांकि अमर उजाला ने मंगलवार को ही अपनी एक रिपोर्ट में पुष्टि कर दी थी की वह जल्द ही अपना इस्तीफा दे सकते है। 

बता दें कि यौन उत्पीड़न के आरोपों में घिरे विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर मामले की गुरुवार को पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई भी होगी। दूसरी तरफ मंत्री के खिलाफ गवाही देने वाली महिला पत्रकारों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। अब प्रिया रमानी समेत इस मामले में गवाही देने वाली पत्रकारों की संख्या 20 हो गई है। अकबर के इस्तीफे के बाद प्रिया रमानी ने ट्वीट कर इसे अपनी जीत बताया है। 

मंगलवार को पत्रकार तुषिता मेहता ने आरोप लगाया, ‘1990 के दशक में अकबर ने होटल के एक कमरे में मुझे बुलाया था। उस समय वह टेलीग्राफ के संपादक थे और मैं ट्रेनी थी। मेरी उम्र 22 साल थी। हैदराबाद में डेक्कन क्रोनिकल में काम करने के दौरान अकबर ने दो बार मेरा यौन शोषण किया।’ 

क्विंट के लिए लेख लिखने वाली कारोबारी स्वाति गौतम ने भी मंगलवार को ही आरोप लगाया कि एक बार अकबर ने मुझे भी होटल के कमरे में बुलाया था। उस वक्त मैं कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज में पढ़ती थी और उन्हें बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित करने गई थी। उस समय वह केवल तौलिये में थे। कमरे में मेरे घुसते ही उन्होंने मेरी तरफ गिलास लुढ़काते हुए अपने लिए ड्रिंक बनाने को कहा। शुरू में तो मैं अवाक रह गई लेकिन तत्काल संभली और झुकते हुए गिलास उनकी तरफ लुढ़का दिया। उन पर कड़ी नजर डालते हुए उस कमरे से बाहर निकल गई। 

अकबर पर अब तक 16 महिलाएं मीटू मुहिम के तहत यौन उत्पीड़न का आरोप लगा चुकी हैं। महिला प्रेस कॉर्प्स के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर इस मामले पर सरकार के ढुलमुल रवैये को लेकर नाराजगी जताई है। एशियन ऐज में काम कर चुकीं महिला पत्रकारों ने साझा बयान जारी कर कहा है कि अकबर के खिलाफ लड़ाई में रमानी अकेली नहीं हैं। उन्होंने अदालत में भी अपने बयान दर्ज कराने का अनुरोध किया है। अकबर के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिला पत्रकारों की संख्या अब 20 हो गई है। 

रमानी ने बेहद सूझ-बूझ से अपने मामले को आगे बढ़ाया। वह एमजे अकबर द्वारा मानहानि का दावा करने के बाद भी नहीं झुकीं। एमजे अकबर द्वारा कानूनी दावा करने के बाद तुषिता पटेल सामने आईं और बुधवार 17 अक्टबूर को 20 महिलाएं अकबर के खिलाफ गवाही देने के लिए सामने आ गईं।

गवाही देने को तैयार 20 महिला पत्रकार

मी टू कैंपेन के तहत गवाही देने के लिए सामने आने वाली महिलाओं में मीनल बघेल, मनीषा पांडे, तुषिता पटेल, कणिका गहलोत, सुपर्णा शर्मा, रमोला तलवार, बादाम होइहनु हौजल, आयशा खन, कुशलरानी, कनीजा गजारा, मालविका बनर्जी, एटी जयंती, हमीदा पार्कर, जोनाली बुरागोहन, मीनाक्षी कुमार, सुजाता दत्ता सचदेवा, रेशमी चक्रवर्ती, किरण मनराल, संजरी चटर्जी प्रमुख हैं।
 
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