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#MeToo: जानें कौन हैं एमजे अकबर, कई महिला पत्रकार लगा चुकी हैं यौन शोषण का आरोप

Wed, 17 Oct 2018 05:26 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विदेश राज्य मंत्री और पूर्व पत्रकार एमजे अकबर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पिछले दिनों पत्रकार प्रिया रमानी पर मानहानि का मुकदमा दायर किया था। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि 'मेरे खिलाफ लगाए गए सभी आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं। मैं इस मामले पर पहले जवाब नहीं दे सका, क्योंकि मैं आधिकारिक दौरे पर  विदेश में था। वह रविवार को ही नाइजीरिया से वापस लौटे थे।' 

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यह भी पढ़ें: #MeToo: विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने अपने पद से दिया इस्तीफा

बता दें कि यौन उत्पीड़न के आरोपों में घिरे एम जे अकबर मामले की बृहस्पतिवार 18 अक्तूबर को पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई होनी है। दूसरी तरफ मंत्री के खिलाफ गवाही देने वाली महिला पत्रकारों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। अब प्रिया रमानी समेत इस मामले में गवाही देने वाली पत्रकारों की संख्या 20 हो गई है। मंगलवार को पत्रकार तुषिता मेहता ने आरोप लगाया, ‘1990 के दशक में अकबर ने होटल के एक कमरे में मुझे बुलाया था। उस समय वह टेलीग्राफ के संपादक थे और मैं ट्रेनी थी। मेरी उम्र 22 साल थी। हैदराबाद में डेक्कन क्रोनिकल में काम करने के दौरान अकबर ने दो बार मेरा यौन शोषण किया।’ 
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आइए जाने कौन हैं एम जे अकबर

मोबाशर जावेद अकबर पेशे से पत्रकार, लेखक और भारतीय राजनेता हैं। वर्तमान में वह मोदी सरकार में विदेश राज्यमंत्री का पद संभाल रहे हैं और मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। 5 जुलाई, 2016 को उन्हें पीएम  नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट मंत्री नियुक्त किया था। 1971 में उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया से ट्रेनी के तौर पर अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की थी। वह एशियन एज और डेक्कन क्रॉनिकल के संपादक रह चुके हैं।

कांग्रेस और भाजपा में है गहरी पैठ

अकबर सबसे पहले वह 1989 से 1991 के बीच कांग्रेस पार्टी से सांसद बने थे। वह पूर्व प्रधानंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में प्रधानमंत्री के प्रवक्ता भी रह चुके हैं। 2014 में वह भाजपा में शामिल हो गए और उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया था। जुलाई 2015 में वह झारखंड से राज्यसभा सांसद थे। हालांकि 17 जून 2016 को इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद जून में ही उन्हें दोबारा एमपी से राज्यसभा सांसद बनाया गया था।

द टेलिग्राफ और एशियन एज किया था शुरू

पत्रकार के तौर पर अपने लंबे करियर के दौरान एमजे अकबर ने 1976 में भारत के पहले साप्ताहिक राजनीतिक मैग्जीन संडे की शुरुआत की थी। इसके अलावा 1989 और 1994 में उन्होंने दो समाचारपत्रों- द टेलिग्राफ और एशियन एज शुरू किया था। वह इंडिया टुडे के मुख्य संपादक रह चुके हैं।

यह भी पढ़ें: #MeToo: 20 महिला पत्रकार अकबर के खिलाफ गवाही देने के लिए तैयार, सुनवाई कल

इसके साथ ही वह साप्ताहिक समाचारपत्र द संडे गार्डियन के संपादकीय निदेशक और संस्थापक रह चुके हैं। इसके बाद राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय रहने के लिए उन्होंने पत्रकारिता छोड़ दी थी। वह कई बड़े मीडिया हाउस और पत्रिकाओं से जुड़े रहे हैं। जिसमें इंडिया टुडे, हेडलाइंस टुडे, द टेलिग्राफ, द एशियन एज और डेक्कन क्रॉनिकल नाम शामिल हैं।

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एम जे अकबर
फिक्शन और नॉन फिक्शन किताबें लिखी 

अकबर ने बहुत सी नॉन फिक्शन किताबें लिखी हैं जिसमें जवाहर लाल नेहरू की जीवनी- नेहरू: द मेकिंग ऑफ इंडिया, कश्मीर पर लिखी किताब- कश्मीर बिहाइंड द वेल, रायट आफ्टर रायट एंड इंडिया: द सीज विदीन शामिल हैं। उन्होंने शेड्स ऑफ स्वोर्ड्स, ए हिस्ट्री ऑफ जिहाद किताबें लिखी हैं।

उन्होंने फिक्शन किताब जैसे ब्लड ब्रदर्स-ए फैमिली सागा (इटली के लेखक की किताब फ्राटेली डी सांग्यू का अनुवाद) लिखा है। उन्होंने यात्रा संस्करण हैव पेन, विल ट्रैवल: ऑब्जरवेशन ऑफ ए ग्लोबट्रोटर लिखे हैं। उनकी एक किताब बायलाइन नाम से है जिसमें उनके द्वारा अपने नाम से लिखे लेखों को जमा किया गया है। जनवरी 2012 को आई उनकी किताब टिंडरबॉक्स: द पास्ट एंड फ्यूचर ऑफ पाकिस्तान में पहचान का संकट और वर्ग संघर्ष को लेकर बातचीत शुरू करने का काम किया था।

महिला पत्रकारों ने लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप

बता दें कि एमजे अकबर पर पिछले दिनों मी टू अभियान के तहत कुछ महिला पत्रकारों ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। महिलाओं का आरोप है कि विभिन्न संस्थानों में संपादक रहते हुए उन्होंने उनका शोषण किया था। जिन महिलाओं ने उनपर आरोप लगाए हैं उनमें प्रिया रमानी और प्रेरणा सिंह बिंद्रा शामिल हैं। रमानी का कहना है कि अकबर ने होटल के एक कमरे में इंटरव्यू के दौरान कई महिला पत्रकारों के साथ आपत्तिजनक हरकतें की हैं।

वहीं बिंद्रा का कहना है कि उनके साथ हुई घटना 17 साल पुरानी है। अकबर उनसे अश्लील टिप्पणियां किया करते थे और उनका जीना मुश्किल कर दिया था। वह इतने सालों तक इसलिए चुप रहीं क्योंकि उनके पास सबूत नहीं थे।
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