तुगलकाबाद में रविदास मंदिर को ढहाने को लेकर कांग्रेस के दो पूर्व सांसदों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पूर्व सांसद अशोक तंवर और प्रदीप जैन आदित्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि रविदास मंदिर को तोड़ने और मंदिर वाली जगह पर जाने पर पाबंदी को पूजा करने के अधिकार से वंचित रहना बताया है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे मंदिर वाली जगह पर संपत्ति का अधिकार नहीं मांग रहे हैं बल्कि वे संत गुरु रामदास की पावन जगह पर पूजा का अधिकार मांग रहे हैं। सुल्तान सिकंदर लोदी ने वर्ष 1509 में यह जगह संत रामदास को उपहार में दी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें उस जगह पर पूजा करने का मौलिक अधिकार है और यह अधिकार संविधान के अुनच्छेद-21 के तहत उन्हें मिला हुआ है।
मालूम हो कि गत 21 अगस्त को डीडीए द्वारा रविदास मंदिर को ढहाए जाने के बाद दलित समुदाय के लोगों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया था। संत रामदास के समर्थकों का मानना है कि उनके गुरु उसी मंदिर में निवास करते थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए डीडीए ने यह कार्रवाई की थी।
याचिका में कहा गया है कि भले ही उस जगह को वर्ष 1980 में संरक्षित वन वाली जगह घोषित कर दिया गया था, बावजूद इसके वहां बिना किसी रुकावट के पूजा-अर्चना सहित अन्य धार्मिक कार्य संपन्न हो रहे थे।