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CAA: सीएए के तहत आसानी से मिली भारतीय नागरिकता, पूर्व बांग्लादेशी नागरिक अपने रिश्तेदारों का भी करेगा आवेदन

Sat, 01 Jun 2024 12:58 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

भारत आने के कारणों के बारे में बताते हुए मंडल ने कहा, 'हमारे ज़्यादातर रिश्तेदार यहीं बसे हुए हैं। हम अपने भविष्य के बारे में सोचकर बहुत मानसिक तनाव में रहते थे, क्योंकि हम अपने प्रियजनों के बिना बांग्लादेश में रह गए थे।' 
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सीएए - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सीएए के तहत भारतीय नागरिकता आसानी से मिलने से सुखद आश्चर्य में डूबे पूर्व बांग्लादेशी नागरिक विकास मंडल ने अब अपने परिवार के सदस्यों को भी जल्द ही भारतीय नागरिकता दिलाने की योजना बना ली है। फिलहाल वह प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करवाने की योजना बना रहे हैं। मंडल ने कहा कि उनके माता-पिता और पत्नी, जो बांग्लादेशी नागरिक हैं, ने अभी तक नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन नहीं किया है।
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खुद भारतीय नागरिक बनने के बाद अपने रिश्तेदारों के लिए भी करेंगे आवेदन
सीएए के तहत आसानी से नागरिकता मिलने से खुश मंडल ने कहा कि 'अब, मैं अपने पिता, माता और पत्नी से भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करवाने की योजना बना रहा हूँ।' पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के आसननगर में अपने परिवार के साथ रह रहे विकास मंडल ने दावा किया कि दस्तावेज़ीकरण और सत्यापन प्रक्रिया 'आसान और परेशानी मुक्त' थी। मूल रूप से बांग्लादेश के झेनइदाह जिले के रहने वाले मंडल और उनका परिवार आसननगर में बस गए, क्योंकि यहाँ उनके रिश्तेदार रहते थे।

सीएए के तहत नागरिकता पाने के लिए किया आवेदन
34 वर्षीय विकास ने कहा कि भारत में बसने के बाद उन्होंने शादी कर ली और उनकी पत्नी भी बांग्लादेश से हैं। भारत आने के कारणों के बारे में बताते हुए मंडल ने कहा, 'हमारे ज़्यादातर रिश्तेदार यहीं बसे हुए हैं। हम अपने भविष्य के बारे में सोचकर बहुत मानसिक तनाव में रहते थे, क्योंकि हम अपने प्रियजनों के बिना बांग्लादेश में रह गए थे।' 2012 में अपने माता-पिता के साथ भारत आए मंडल ने कहा कि उन्होंने पहले नागरिकता के लिए प्रयास नहीं किया, हालांकि उनके पास 2014 से पहले का राशन कार्ड है। उन्होंने कहा, 'सीएए अधिसूचना के बारे में पता चलने के बाद, मैंने 27 अप्रैल को निर्धारित पोर्टल से आवेदन किया।' 
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आसानी से मिली भारतीय नागरिकता
मंडल ने कहा, 'सत्यापन प्रक्रिया आसान थी। मैंने बांग्लादेश में स्थानीय अधिकारियों द्वारा दिया गया अपना जन्म प्रमाण पत्र और राशन कार्ड प्रस्तुत किया।' उन्होंने कहा कि दस्तावेजों का सत्यापन 27 मई को नादिया जिला मुख्यालय कृष्णनगर में डाक अधीक्षक के कार्यालय में किया गया था। मंडल ने कहा, 'मुझे 29 मई को ईमेल के ज़रिए नागरिकता का आधिकारिक दस्तावेज़ मिला।' गृह मंत्रालय द्वारा मंडल को दिया गया 'प्राकृतिककरण प्रमाणपत्र' उन्हें "सभी राजनीतिक और अन्य अधिकारों, शक्तियों और विशेषाधिकारों का हकदार बनाता है और उन सभी दायित्वों, कर्तव्यों और देनदारियों के अधीन है, जिनके लिए एक भारतीय नागरिक हकदार है या जिसके अधीन है।' 

मंडल ने बताया कि झेनइदाह जिले को छोड़ने से पहले, उन्होंने एक मामूली घर के साथ अपनी छोटी सी जमीन बेच दी थी। मंडल ने कहा, 'अब मैं आसननगर में एक साइबर कैफे का मालिक हूं।' मंडल ने कहा कि उनका साढ़े तीन साल का बेटा जन्म से ही भारतीय नागरिक है। सीएए को दिसंबर 2019 में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से प्रताड़ित हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई प्रवासियों को भारतीय राष्ट्रीयता प्रदान करने के लिए अधिनियमित किया गया था, जो 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत आए थे। केंद्र सरकार ने 11 मार्च को सीएए के नियमों को अधिसूचित किया था, जिससे कानून के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त हुआ, जिसका पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सहित कुछ राजनीतिक दलों ने कड़ा विरोध किया। नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 की अधिसूचना के बाद नागरिकता प्रमाण पत्रों का पहला सेट 15 मई को केंद्रीय गृह सचिव द्वारा नई दिल्ली में आवेदकों को सौंपा गया।
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