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East Tech: कोलकाता में दो दिवसीय 'ईस्ट टेक-2024' का आगाज, सेना प्रमुख ने दिया स्वदेशी रक्षा तकनीक पर जोर

सार

'ईस्ट टेक 2024' रक्षा प्रौद्योगिकी संगोष्ठी कोलकाता के बिस्वा बंगला मेला प्रांगण में शुरू हुई। कार्यक्रम का उद्घाटन पश्चिम बंगाल के खेल एवं युवा मामलों के मंत्री अरूप विश्वास ने किया।
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ईस्ट टेक-2024 में हथियारों की जानकारी लेते मुख्य अतिथि और भारतीय सेना के पूर्वी कमान प्रमुख। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने कहा है कि आत्म-निर्भर भारत के लिए स्वदेशी रक्षा तकनीकी जरूरी है। उन्होंने भारतीय सेना की परिचालन जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वदेशी रक्षा तकनीक के विकास और उसे अपनाने की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कोलकाता में मंगलवार को दो दिवसीय ''ईस्ट टेक -2024' रक्षा प्रौद्योगिकी संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को एक रिकॉर्डेड वीडियो संदेश के माध्यम से उपस्थित लोगों को संबोधित किया। जनरल द्विवेदी ने विशेष रूप से 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण के तहत, भारतीय सेना की क्षमता को बढ़ाने के लिए स्वदेशी तकनीक को लागू करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

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'ईस्ट टेक 2024' रक्षा प्रौद्योगिकी संगोष्ठी कोलकाता के बिस्वा बंगला मेला प्रांगण में शुरू हुई। कार्यक्रम का उद्घाटन पश्चिम बंगाल के खेल एवं युवा मामलों के मंत्री अरूप विश्वास ने किया। साथ में मौजूद थे भारतीय सेना के पूर्वी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राम चंदर तिवारी। कार्यक्रम में ब्रह्मास्त्र कोर के कमांडर और सैन्य, अर्ध-सैन्य बलों और नागरिक प्रशासन के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस मौके पर सेना कमांडर ने कहा कि भारतीय सेना के सबसे बड़े ऑपरेशनल कमांड, पूर्वी कमान की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि यह कमान पारंपरिक युद्ध से लेकर आतंकवाद-रोधी अभियान, साइबर खतरे, और ग्रे-जोन युद्ध जैसी चुनौतियों का सामना करता है। इन जटिल परिचालन चुनौतियों को हल करने के लिए, क्षेत्रीय संरचनाओं के निरंतर आधुनिकीकरण और स्वदेशी तकनीक का एकीकरण आवश्यक है। उन्होंने इस कार्यक्रम के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि 'ईस्ट टेक 2024' का लक्ष्य पूर्वी कमान को अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक से सुसज्जित करना है, ताकि वे इन महत्वपूर्ण परिचालन चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रह सकें।

भारतीय सेना के पूर्वी कमान द्वारा आयोजित और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और भारतीय रक्षा निर्माताओं की सोसाइटी (एसआईडीएम) के सहयोग से 'ईस्ट टेक 2024' इसका आयोजन किया है। इसमें 140 से कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। इसका उद्देश्य भारतीय सेना और विशेष रूप से पूर्वी थिएटर में परिचालन चुनौतियों का समाधान करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों को उजागर करना है। इस कार्यक्रम में संचार, रणनीतिक गतिशीलता, सुरक्षा और सस्टेनेन्स, सर्वाइवलिबिलिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक, रोबोटिक्स और आग्नेयास्त्र समाधान जैसी विभिन्न तकनीकी नवाचारों को प्रदर्शित किया गया।
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इस मौके पर एसआईडीएम अध्यक्ष राजिंदर सिंह भाटिया ने इस कार्यक्रम की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, इसमें विशेष रूप से पश्चिम बंगाल जैसे पूर्वी क्षेत्र के एमएसएमई को रक्षा उत्पादन में शामिल किया जाएगा, जो देश में एमएसएमई के मामले में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि 'ईस्ट टेक 2024' इन उद्यमों को एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिलता है और राष्ट्रीय रक्षा में उनका योगदान बढ़ता है। पश्चिम बंगाल के खेल एवं युवा मामलों के मंत्री अरूप विश्वास ने राज्य के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में केंद्रीय भूमिका की बात की, यह उल्लेख करते हुए कि पश्चिम बंगाल, जो देश में एमएसएमई की संख्या में दूसरे स्थान पर है, भारत के रक्षा निर्माण लक्ष्यों को समर्थन देने के लिए अनूठी स्थिति में है। उन्होंने राज्य की क्षमता पर विश्वास व्यक्त किया, जो रक्षा क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने में मदद करेगा, जिससे भारतीय सेना की बदलती परिचालन आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

भारतीय रक्षा निर्माताओं की प्रतिक्रिया अत्यधिक उत्साहजनक रही और देश भर से 150 से अधिक प्रतिनिधि, जिनमें एमएसएमइयां भी शामिल हैं, इस कार्यक्रम में अपनी नवीनतम और सबसे उन्नत हथियार एवं उपकरण प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन करने के लिए कोलकाता पहुंचे। यह कार्यक्रम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के विकास और विशेष तकनीकी समाधानों की प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रवेश की नई शुरुआत का प्रतीक बनकर उभरा। कार्यक्रम के दौरान, मंत्री और सेना कमांडर ने विभिन्न स्टॉलों का दौरा किया, प्रदर्शित उत्पादों का निरीक्षण किया और रक्षा निर्माताओं से मुलाकात की, ताकि उनके योगदान पर चर्चा की जा सके। इस अवसर पर, सेना कमांडर ने सीआईआई, एसआईडीएम और अन्य उद्योग भागीदारों के प्रतिनिधियों को उनके समर्थन के लिए सम्मानित किया और उन्हें स्मृति चिह्न भेंट कीं।

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