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Corona: सिंगापुर-हांगकांग में संक्रमण फैला रहे कोरोना वेरिएंट के 2 केस भारत में; पुणे-चेन्नई में सामने आए मरीज

Thu, 19 Jun 2025 05:24 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कोरोना के एनबी.1.8.1 (निमबस) नामक नए वेरिएंट के भारत में केवल दो मामले दर्ज हुए हैं जिनमें से एक चेन्नई से और एक पुणे से। दोनों मामलों में लक्षण मध्यम स्तर के पाए गए हैं।
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कोरोना टेस्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सिंगापुर-हांगकांग में कोरोना संक्रमण की नई लहर लाने वाला वेरिएंट अब भारत में भी मिला है। पुणे और चेन्नई में एक एक मरीज सामने आया है जिनमें निमबस वेरिएंट का पता चला है। पुणे स्थित आईसीएमआर के एनआईवी ने जीनोम सीक्वेसिंग में इसकी पुष्टि की है। विश्व स्तर पर एनबी.1.8.1 (निमबस) नामक नया वेरिएंट कई देशों सिंगापुर और हांगकांग में संक्रमण की लहर ला रहा है।

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भारत में अब तक इस वेरिएंट के केवल दो मामले दर्ज हुए हैं जिनमें से एक चेन्नई से और एक पुणे से। दोनों मामलों में लक्षण मध्यम स्तर के पाए गए हैं। आईसीएमआर के पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान ने जारी नवीनतम जीनोमिक विश्लेषण में बताया कि बीते अप्रैल 2025 के दूसरे सप्ताह से कोविड-19 के मामलों में आई तेजी के पीछे ओमिक्रॉन के उप स्वरूप जेएन.1.16 का हाथ था, जिसे अब एक्सएफजी (एसएफ.7 और एलपी.81.2) नामक नया पुनः संयोजित वेरिएंट पीछे छोड़ चुका है। आईसीएमआर-एनआईवी पुणे के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने कहा है कि नया वेरिएंट अधिक खतरनाक नहीं है, और अब तक की निगरानी से कोई चिंता का कारण नहीं दिखता।

 एनआईवी पुणे में हाई परफॉर्मेंस कम्प्यूटिंग सुविधा
भारत की वायरस निगरानी और महामारी से निपटने की रणनीति को नई तकनीकी ताकत मिली है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) में देश की पहली हाई परफॉर्मेंस कम्प्यूटिंग सुविधा ‘नक्षत्र’ शुरू की है। यह सुविधा भारत को भविष्य की स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए तकनीकी रूप से अधिक सशक्त बनाएगी।
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परियोजना का मुख्य उद्देश्य जीनोमिक और बायोइन्फॉर्मेटिक्स डेटा के तेजी से विश्लेषण को संभव बनाना है, ऐसी क्षमता जो कोविड-19 महामारी के दौरान अत्यंत आवश्यक साबित हुई थी। पुणे के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. सारा चेरियन ने बताया कि यह क्लस्टर पांच आईसीएमआर संस्थानों को सेवा देगा और प्रयोगशाला नेटवर्क को तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।  

कुछ घंटों में होगी जीनोम सीक्वेसिंग
एनआईवी के निदेशक डॉ नवीन कुमार ने कहा कि नक्षत्र सिर्फ एक कंप्यूटिंग क्लस्टर नहीं, बल्कि भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा का नया प्रहरी बनकर उभरा है। डॉ कुमार ने बताया, वायरस के प्रसारित स्वरूपों की पहचान के लिए जीनोम सीक्वेसिंग एक विकल्प है। कोरोना संक्रमित मरीज के नमूने की जीनोम सीक्वेसिंग कर यह पता लगाया जाता है कि मरीज में वायरस का स्वरूप कौनसा है?

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