अंडमान-निकोबार द्वीप पर मारे गए अमेरिकी नागरिक जॉन ऐलन चाउ (26) की जनजाति द्वारा हत्या मामले में पुलिस ने एक नया खुलासा किया है। पुलिस का कहना है कि चाउ को वहांं जोने के लिए दो अमेरिकी मिशनरियों ने प्रोत्साहित किया था। वह जनजाति के लोगों का धर्म परिवर्तन कराने के लिए वहां गया था। वरिष्ठ जांचकर्ता ने शनिवार को ये बात कही।
अंडमान-निकोबार में पुलिस हेड दीपक पाठक ने कहा कि संदिग्धों ने भारत छोड़ दिया है और चाउ के शव का भी वहां कोई सबूत नहीं मिला है। 17 नवंबर को यहां रह रही सेंटिनल जनजाति ने चाउ की हत्या कर दी थी।
पाठक ने कहा, "हम मामले में दो अमेरिकियों की भूमिका की जांच कर रहे हैं, एक पुरुष और एक महिला। जो चाउ से मिले थे। ये दोनों लोग ईसाई धर्म के प्रचार से संबंधित गतिविधियों से जुड़े पाए गए हैं और इन्होंने ही चाउ को द्वीप पर जाने के लिए प्रोत्साहित किया था।"
हालांकि पुलिस ने इस दंपत्ति के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी है और न ही ये बताया है कि वह किस संगठन से जुड़े थे। पाठक ने कहा कि जांचकर्ताओं ने चाउ के फोन से किए कॉल को ट्रेस कर इन दो लोगों के बारे में पता किया। दोनों के पास स्थानीय नंबर पाए गए। चाउ को यहां तक लाने वाले मछुआरे ने कहा कि इन लोगों ने चाउ को मारकर बीच पर ही दफना दिया था। पुलिस अब चाउ का शव वहां तलाश रही है, जहां जनजाति के लोगों ने उसे दफनाया है।
मामले में पुलिस ने अभी तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। जिसमें ये मछुआरा भी शामिल है। चाउ यहां ईसाई धर्म के प्रचार के लिए आए थे।
बता दें ये जनजाति इस द्वीप पर करीब 60,000 सालों से रह रही है। इन लोगों को कोई भी बीमारी आसानी से लग सकती है। इनमें रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता भी नहीं होती क्योंकि ये बाहरी दुनिया से बिल्कुल कटे हुए हैं। यहां तक कि अगर कोई पर्यटक सामान्य फ्लू वाले वायरस के साथ यहां आ जाए तो उससे ये पूरी जनजाति समाप्त हो सकती है।