गुरुवार को भारत को दोहरी खुशी मिली। राजधानी दिल्ली की ऐतिहासिक निजामुद्दीन बस्ती के शहरी पुनरोद्धार के प्रोजेक्ट को यूनेस्को की दो श्रेणी में अवॉर्ड मिले हैं। इस साल के यूनेस्को एशिया-प्रशांत अवॉर्ड के तहत ये सम्मान दिए जाएंगे। सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए इस प्रोजेक्ट को अवॉर्ड के लिए चुना गया है।
संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने कहा कि निजामुद्दीन बस्ती प्रोजेक्ट ने उत्कृष्टता का एक प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता है। इसके अलावा सतत विकास श्रेणी के लिए विशेष तौर पर एक और पुरस्कार जीता है।
12 देशों की 39 प्रविष्टियां आई थीं
यूनेस्को बैंकॉक ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि विरासत विशेषज्ञों की जूरी ने छह देशों- बांग्लादेश, भारत, जापान, मलेशिया व थाईलैंड की नौ परियोजनाओं को पुरस्कार के लिए चुना है। समूचे एशिया प्रशांत क्षेत्र से ज्यूरी ने 12 देशों की 39 प्रविष्टियों पर विचार किया। जूरी ने नवंबर माह में इन प्रविष्टियों की आनलाइन समीक्षा की थी।
जूरी ने कहा कि निजामुद्दीन बस्ती प्रोजेक्ट को विरासत संरक्षण के सतत विकास एजेंडे के केंद्र में रखने में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल की। इसकी सराहना करते हुए जूरी ने कहा कि सरकार व जनता की भागीदारी से पीपीपी मॉडल से क्षेत्र की प्रमुख सामाजिक व आर्थिक चुनौतियों पर काबू पाया गया। साथ ही बेहतर स्वास्थ्य, महिलाओं व युवाओं के कल्याण और शिक्षा के प्रबंध किए गए।
आगा खान ट्रस्ट फॉर कल्चर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दक्षिण दिल्ली के निजामुद्दीन में यह प्रोजेक्ट 2007 में शुरू किया गया था। इसके तहत कई तरह की पहल की गई। इससे सदियों पुराने इलाके में लोगों के जीवन स्तर की गुणवत्ता और आजीविका में सुधार आया। इसके लिए स्थानीय नागरिकों, निकाय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और कुछ अन्य एजेंसियों ने अहम भूमिका निभाई
निजामुद्दीन औलिया की दरगाह समेत 20 स्मारकों का पुनरुद्धार किया
निजामुद्दीन बस्ती पुनरुद्धार प्रोजेक्ट के तहत सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया की 14 वीं शताब्दी के दरगाह और उसके आसपास के 20 से अधिक ऐतिहासिक स्मारकों का पुनरुद्धार भी किया गया।