तमिलनाडु के वित्त मंत्री मैरी विल्सन ने मंगलवार को राज्य की आर्थिक स्थिति पर एक श्वेत पत्र जारी किया, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली पिछली डीएमके सरकार की कमियों को उजागर किया गया। सचिवालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मंत्री विल्सन ने कहा कि तमिलनाडु पर 10 लाख करोड़ रुपये का सीधा कर्ज का बोझ है और 78,324 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा है, जो 'अब तक का सबसे अधिक स्तर' है। राज्य का अपना कर राजस्व (एसओटीआर) और सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के प्रमुख आंकड़ों की बात करें तो यह 5.45 प्रतिशत था, जो काफी कम था। मुख्यमंत्री का पद संभालने के तुरंत बाद, टीवीके के संस्थापक सी. जोसेफ विजय ने आश्वासन दिया था कि उनकी सरकार राज्य की आर्थिक स्थिति पर एक श्वेत पत्र जारी करेगी।
कर्ज लगभग दोगुना हुआ
रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल 2021 को तमिलनाडु पर कुल बकाया कर्ज 5.13 लाख करोड़ रुपये था, जो 31 मार्च 2026 तक बढ़कर लगभग 10 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी पांच वर्षों में कर्ज लगभग दोगुना हो गया। वित्त मंत्री ने कहा कि यदि सरकारी उपक्रमों द्वारा लिए गए कर्ज को भी शामिल किया जाए तो राज्य का वास्तविक कर्ज भार 13.18 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है।
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श्वेत पत्र की छह प्रमुख बातें
सरकार ने अपनी रिपोर्ट में छह मुख्य निष्कर्ष बताए हैं।
- 1. राज्य का कर्ज पांच साल में लगभग दोगुना हो गया।
- 2. ब्याज भुगतान का बोझ बहुत बढ़ गया है।
- 3. राजस्व घाटा अब स्थायी समस्या बन गया है।
- 4. राज्य की कर संग्रहण क्षमता कमजोर हुई है।
- 5. वेतन, पेंशन और ब्याज जैसे खर्च विकास कार्यों के लिए उपलब्ध धन को कम कर रहे हैं।
- 6. छिपी हुई देनदारियां वास्तविक कर्ज को और बढ़ाती हैं।
प्रति व्यक्ति कर्ज 1.29 लाख रुपये
श्वेत पत्र के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में राज्य का कर्ज-जीएसडीपी अनुपात 28.3 प्रतिशत रहा, जो कोविड काल के बाद भी कम नहीं हो पाया। राज्य में प्रति व्यक्ति देनदारी बढ़कर 1,28,934 रुपये हो गई है, जो कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों की तुलना में अधिक बताई गई है।
ब्याज भुगतान तेजी से बढ़ा
रिपोर्ट के अनुसार, 2021-22 में राज्य का वार्षिक ब्याज भुगतान 41,564 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 67,050 करोड़ रुपये हो गया। यह लगभग 61 प्रतिशत की वृद्धि है। अब राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों का लगभग 22.8 प्रतिशत हिस्सा केवल ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है। वहीं राज्य के अपने कर राजस्व का करीब 34.8 प्रतिशत हिस्सा ब्याज भुगतान में जा रहा है। सरकार का कहना है कि तमिलनाडु अब भविष्य के विकास कार्यों पर खर्च करने की बजाय पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने में अधिक धन लगा रहा है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा राजस्व घाटा
श्वेत पत्र में कहा गया है कि 2025-26 में तमिलनाडु का राजस्व घाटा 78,324 करोड़ रुपये रहा, जो राज्य के इतिहास में सबसे अधिक है। यह घाटा कोविड महामारी वाले वर्ष 2020-21 से भी अधिक है। तुलना में कर्नाटक और महाराष्ट्र का राजस्व घाटा तमिलनाडु से काफी कम रहा, जबकि गुजरात ने राजस्व अधिशेष दर्ज किया।
कर संग्रहण में गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की अपनी कर आय और जीएसडीपी का अनुपात 2021-22 में 5.93 प्रतिशत था, जो 2025-26 में घटकर 5.45 प्रतिशत रह गया। इसे राज्य के इतिहास का सबसे निचला स्तर बताया गया है। सरकार का दावा है कि कर संग्रहण में कमी के कारण पिछले तीन वर्षों में राज्य को लगभग 51,000 करोड़ रुपये का संभावित राजस्व नुकसान हुआ। जीएसटी, पेट्रोलियम वैट, स्टांप शुल्क, आबकारी कर और मोटर वाहन कर जैसे लगभग सभी प्रमुख कर स्रोतों में गिरावट दर्ज की गई है।
भ्रष्टाचार और लीकेज को बताया जिम्मेदार
टीवीके सरकार ने कहा कि कर संग्रह करने वाले विभागों में भ्रष्टाचार और राजस्व रिसाव इस स्थिति के प्रमुख कारण हैं। सरकार ने आश्वासन दिया कि वह भ्रष्टाचार पर रोक लगाकर और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाकर वित्तीय स्थिति सुधारने का प्रयास करेगी।
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विकास कार्यों के लिए कम बच रहा पैसा
रिपोर्ट के अनुसार, वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे प्रतिबद्ध व्यय 2021-22 के 1.25 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 1.89 लाख करोड़ रुपये हो गए। अब ये खर्च राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों का 64.4 प्रतिशत हिस्सा खा रहे हैं। अन्य अनिवार्य खर्च जोड़ने पर लगभग 87 प्रतिशत राजस्व पहले से ही तय खर्चों में चला जाता है। इस कारण विकास योजनाओं और पूंजीगत निवेश के लिए बहुत कम धन बचता है। राज्य का पूंजीगत व्यय कुल खर्च का केवल 11.8 प्रतिशत रह गया है, जो कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात की तुलना में सबसे कम बताया गया है।
क्या है विजय सरकार का दावा?
टीवीके सरकार ने कहा कि यह श्वेत पत्र किसी पर राजनीतिक आरोप लगाने के लिए नहीं, बल्कि राज्य की वास्तविक वित्तीय स्थिति को जनता के सामने रखने के लिए तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सत्ता संभालने के बाद राज्य की आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने का वादा किया था, जिसे अब पूरा किया गया है। सरकार का कहना है कि राजस्व बढ़ाने, भ्रष्टाचार रोकने और वित्तीय अनुशासन लागू करने के जरिए तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने का प्रयास किया जाएगा।