भारत-तुर्की बिजनेस समिट को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विश्व के टॉप 20 अर्थव्यवस्थाओं में भारत और तुर्की के नाम शामिल है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने अर्थव्यवस्था मजबूत करने में स्थिरता दिकाई है। तुर्की से संबंध बेहतर का उल्लेख करते हुए पीएम ने कहा कि हमें इस समृद्ध विरासत, विशाल क्षमता और द्विपक्षीय संबंधों (तुर्की के साथ) को बढ़ाने का अवसर बनाना होगा। पीएम ने कहा कि तीन साल पहले मेरी सरकार इसी महीने में सत्ता में आई थी, तब से हमने अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कई पहल की हैं।
जीएसटी कानून की चर्चा करते हुए पीएम ने कहा कि हाल ही में जीएसटी कानून एक और पहल थी, देश में समान और कुशल कारोबारी वातावरण बनाने की पुरानी मांग थी। उन्होंने कहा कि भारतने अपने रेलवे का आधुनिकीकरण कर रहा है। पीएम ने कहा कि हम 50 शहरों में मेट्रो रेल और हाई स्पीड ट्रेन प्रॉजेक्ट की योजना बना रहे हैं।
इससे पहले राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और पीएम नरेंद्र मोदी से मिले। यहां उन्हें राष्ट्रपति और पीएम ने स्वागत किया। तुर्की प्रिसिडेंट राजघाट भी गए, जहां उन्होंने महात्मा गांधी के प्रतिमा पर श्रद्धांजलि दी। एर्दोगान आज राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी , उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से अलग-अलग मुलाकात करेंगे।
हाल ही में अपने देश में राष्ट्रपति प्रणाली के शासन पर जनमत संग्रह में जीत हासिल करने के बाद एर्दोगान तुर्की के बेहद ताकतवर नेता बन कर उभरे हैं। इस जीत के बाद यह उनका पहला विदेश दौरा है। भारत की निगाहें पाकिस्तान के भी करीबी इस देश से परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी), संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता के साथ-साथ आतंकवाद पर अपने रुख के लिए समर्थन हासिल करना है।
भारत के लिए रवाना होने से पहले कश्मीर पर एर्दोगान के दिए बयान ने दोनों देशों के कूटनीतिज्ञों के बीच चर्चा तेज कर दी है। एर्दोगान ने भारत रवानगी से पहले तुर्की में एक भारतीय चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा है कि कश्मीर घाटी में हिंसा रुकनी चाहिए। उन्होंने कश्मीर समस्या के हल के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने का भी प्रस्ताव दिया। हालांकि एर्दोगान के बयान को लेकर भारत ने स्पष्ट किया है कि यह भारत का आंतरिक मामला है।