पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) टीएस कृष्णमूर्ति ने कहा कि कई चरणों के चुनाव पर दोबारा सोचने की जरूरत है। उन्होंने भविष्य में एक चरण में चुनाव और प्रचार अभियान के समय को कम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें चुनाव के चरणों की संख्या कम करने के तरीकों के बारे सोचना होगा और एक चरण में चुनाव कराए जाने को प्राथमिकता देना होगा।
कृष्णमूर्ति ने कहा कि चुनाव के दौरान जनसभाओं और रोड शो पर रोक नहीं लगाई जा सकती लेकिन भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) इस प्रकार की सभाएं करने की अवधि और दिनों की संख्या में काफी हद तक कटौती करने पर गंभीरता से विचार कर सकता है, क्योंकि अब डिजिटल और सोशल मीडिया जैसे चुनाव प्रचार के वैकल्पिक तरीके हैं ।
उन्होंने कहा कि कई चरणों के चुनावों को इस आधार पर उचित ठहराया जाता है कि इससे हिंसा कम होती है और कानून व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करना आसान हो जाता है। पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में हो रहे चुनाव ने हमें सिखाया कि कई चरणों के चुनाव भी हिंसा, नफरत और व्यक्तिगत हमलों को नहीं रोका जा सकता।
पूर्व सीईसी ने कहा कि हम पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने के बारे में बात कर रहे हैं। लेकिन मैं राज्य में एक दिन एक साथ चुनाव करना पसंद करूंगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ स्थानों पर एक चरण में चुनाव कराना संभव नहीं हैं, लेकिन वह ऐसी जगहों पर कम से कम दो से तीन चरणों में चुनाव करा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया कि गंभीरतापूर्वक इस बात पर परीक्षण किया जाए कि कई चरणों में कराए जा रहे चुनाव अपने उद्देश्यों को पूरा कर रहे हैं या नहीं।