अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप ने 10 साल बाद अमेरिका की धरती पर उतरे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का अभूतपूर्व स्वागत किया। हाथ मिले। दोनों नेता वाशिंगटन में वार्ता की मेज पर हैं। इस मेज से लेकर तीन दिवसीय शी के दौरे के हर हाव-भाव पर दुनिया की नजर है। भारत भी बड़ी बारीकी से नजर रख रहा है।
क्यों अहम है शी का दौरा?
चीन के राष्ट्रपति शी रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन को अपना सबसे करीबी, विश्वास पात्र मानते हैं। शी के सत्ता में आने के 14 साल के भीतर दोनों नेता 40 से अधिक बार मिल चुके हैं। चाहे मसला यूक्रेन युद्ध का हो या फिर ईरान में चल रहे संघर्ष का। दुनिया के रणनीतिकार शी जिनपिंग की गंभीरता और पुतिन की गहराई में एक तालमेल देख लेते हैं। रूस यूक्रेन में फंसा है तो अमेरिका ईरान में। पश्चिम एशिया में शी जिनपिंग ने काफी कुछ दांव पर लगा रखा है। खाड़ी देश में चीन अलग वेवलेंथ पर काम कर रहा है और ग्लोबल साऊथ के मुद्दे पर आगे बढ़ रहा है। हालांकि इस दौरान पड़ोसी देशों से चीन का रवैय्या, दक्षिण चीन सागर में उसका दावा, ताइवान को लेकर कोशिश भी बड़ा मसला है।
आइए दूसरी तरफ चलते हैं। शी जिनपिंग ने 14 साल के शासन काल में चीन को महाशक्ति बनाया। बिना कोई युद्ध लड़े अमेरिका के सामानांतर ला खड़ा किया है। शी जिनपिंग गंभीर,अनुशासित रहते हैं। फैसले स्थायी और बहुत चबाकर लेने के लिए जाने जाते हैं। बिल्कुल ड्रैगन नीति के अनुकूल। पिछले काफी समय से चीन अमेरिका से व्यापार युद्ध का सामना कर रहा है। अमेरिका के टैरिफ के बदले टैरिफ की नीति पर चल रहा है। अमेरिका के चिप की खेप, तकनीकी आपूर्ति बंद करने पर दबाव में नहीं आता। बदले में रेअर अर्थ मिनरल, रसायन समेत अन्य रोक देता है। बोइंग से विमानों का सौदा निलंबित कर देता है। चीन में ट्विटर, फेसबुक जैसे उसके अपने सोशल मीडिया अकाऊंट हैं। यानी झगड़ा तकनीक और तकनीक का भी चल रहा है। ताइवान को चीन हमेशा घेरे रहता है। अमेरिका ने सभी दांव अजमाने के बाद अब थोड़ा चीन की तरफ नरम रुख दिखाया है।
ट्रंप ने बनाया शी के अमेरिकी दौरे का माहौल
राष्ट्रपित ट्रंप ने चीन से संबंध की जरूरत को समझा है। हो सकता है ट्रेड वार और पश्चिम एशिया में अमेरिका को मिल रहे झटकों ने भी यह स्थिति बनाई हो? संयुक्त राष्ट्र महासभा में जितना राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को डराने की कोशिश की, ईरान ने अपने अंदाज में पलटवार किया। राष्ट्रपति पुतिन लगातार रूस की संप्रभुता और यूक्रेन में युद्ध को लेकर संवेदनशीलता के साथ आक्रामक बने हैं। अमेरिका के पास इसमें चीन की मजबूत उपस्थिति की जानकारी है। इसी क्रम में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप ने 12-15 मई 2026 को चीन का दौरा किया था। उन्होंने अमेरिका की इंडो-पेसिफिक कमान का नाम फिर से पेसिफिक कमान किया और उसे प्रशांत महासागर तक सीमित करने का संकेत दिया। पिछले साल से राष्ट्रपति ट्रंप चीन के रुख को देखकर भारत, जापान आस्ट्रेलिया के साथ बने क्वॉड फोरम के शिखर सम्मेलन को अंतिम रूप देने में आनाकानी की है। उन्होंने चीन के हितों को समझकर संकेत दिया और इसके साथ शी जिनपिंग को अमेरिका आने के लिए आमंत्रित किया। ताकि अमेरिका और चीन चर्चा करके आपसी हितों को आगे बढ़ा सकें।
भारत की भी बारीक नजर
चीन के साथ अमेरिका की द्वपक्षीय वार्ता में भारत नहीं है, लेकिन दोनों के बीच में आगे की बात का भारत पर भी परोक्ष रूप से असर पड़ना तय है। इसलिए भारत वाशिंगटन डीसी पर निगाह गड़ाए है। भारत के साथ-साथ दुनिया के देशों की भी निगाह है। खासकर रूस की। ईरान, इजरायल, सऊदी अरब और तुर्किए की। चीन भारत के साथ एससीओ और ब्रिक्स का मंच साझा करता है।
भारत और चीन के रिश्ते पटरी पर लौट रहे हैं। भारत एआई, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में छलांग लगाने के लिए कमर कस रहा है। इसके अलावा सौर ऊर्जा समेत तमाम क्षेत्रों में गति पकड़ रहा है। भारत में बढ़ते उद्यमी इकोसिस्टम पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नजर है। वह चीन पर निर्भरता कम करना चाहती हैं। दूसरे पाकिस्तान के साथ भारत का रिश्ता खटास भरा है। पाकिस्तान चीन के रक्षा बाजार का खरीददार है। अमेरिका ने पाकिस्तान को भाव देना शुरू किया है। इस तरह से चीन और अमेरिका के रिश्ते का असर इन परिस्थितियों और भू-राजनीतिक स्थितियों पर भी पड़ेगा।
प्रधानमंत्री मोदी दिसंबर में जा सकते हैं अमेरिका
वातावरण बन रहा है। अमेरिका से रिश्ते की पृष्ठभूमि भी। अमेरिका जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजक देश है। भारत जी-20 का सदस्य है। यह शिखर सम्मलेन 14-15 दिसंबर 2026 को अमेरिका की अध्यक्षता में फ्लोरिडा में होगा। भारत ने इस सम्मेलन की 2023 में अध्यक्षता की थी। इसकी पूरी संभावना है कि प्रधानमंत्री इस दौरान अमेरिका का दौरा करेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी द्वपक्षीय भेंट वार्ता प्रस्तावित हो सकती है। इस दौरान भारत-अमेरिका संबंध में तेजी आने तथा आपसी हितों पर सहमति भी बन सकती है।