दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका ने दुनिया के सबसे ताकतवर व्यक्ति का चुनाव कर दिया है। अमेरिका हालांकि डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को जीत दिला कर पहली महिला राष्ट्रपति बनाने का इतिहास नहीं रच सका, मगर जहां तक भारत के हित और अहित का सवाल है तो रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप की जीत हमारे लिए शुभ है।
यह सही है कि डोनाल्ड को दुनिया ने राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद ही जानना समझना शुरू किया है। दुनिया के कई मुद्दों के संदर्भ में ट्रंप का रुख पूरी तरह स्पष्ट न होने से थोड़ी असमंजस की स्थिति भी बनी है।
मगर आतंकवाद, विभिन्न देशों से रिश्तों जैसे सवाल पर ट्रंप ने अपने चुनावी भाषणों में जिस प्रकार का रुख सामने रखा है, उससे भारत की स्थिति मजबूत ही नहीं होगी, बल्कि अमेरिका से नजदीकी और बढ़ेगी। वैसे भी भारत की दुनिया में वर्तमान स्थिति के मद्देनजर किसी की भी जीत या हार से कोई बड़ा परिवर्तन होने वाला भी नहीं था।
जब मैं यह कह रहा हूं कि ट्रंप की जीत भारत के लिए शुभ है तो इसका सीधा मतलब यह है कि भारत के लिहाज से हिलेरी के मुकाबले ट्रंप बेहतर थे। दरअसल हिलेरी 30-35 साल से सक्रिय राजनीति में हैं। इस दौरान उन्होंने सिनेटर, अमेरिका की फस्र्ट लेडी से ले कर विदेश मंत्री तक का सफर तय किया है।
बतौर विदेश मंत्री आतंकवाद के संबंध में उनका रुख कभी भी खुल कर भारत के साथ नहीं रहा। पाकिस्तान केसाथ संतुलन साधने की नीति अपनाते हुए उन्होंने आतंकवाद पीड़ित भारत की पीड़ा को समझने से दूरी बनाए रखी। जहां तक ट्रंप का सवाल है तो भले ही मुसलमानों केखिलाफ तीखी टिप्पणियों के चलते वह विवादास्पद बने, मगर आतंकवाद के प्रति उनका दृष्टिïकोण साफ है।
आतंकवाद के मामले में ट्रंप ने खुल कर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है और रूस की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने का वादा किया है। जाहिर है कि ट्रंप की जीत ने नए समीकरण बनने के संकेत दिए हैं। नया समीकरण पाकिस्तान की परेशानी बढ़ाएगा और अमेरिका के कारण रूस से अपनी नजदीकी के चलते कई बार असहज स्थिति का सामना कर चुके भारत को राहत मिलने के संकेत हैं।
हां, एक बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रंप वीजा नियमों को अपनी चुनावी घोषणा के अनुरूप कड़ा करेंगे और इससे भारतीयों का अमेरिका में प्रवेश पाना मुश्किल होगा? मेरे ख्याल से मुश्किलें डेमोक्रेट सरकार के दौरान ही शुरू हो गई थी। मुझे लगता है कि जब ट्रंप सत्ता की कमान संभालेंगे तब संभवत: उनका नजरिया इतना कठोर नहीं होगा।
जहां तक चुनाव नतीजे की बात है तो भले ही भारतीय मीडिया इसका भनक नहीं पा सकी, मगर अमेरिका पर बारीकी से निगाह रखने वालों को पता था कि वहां लोग परिवर्तन चाहते हैं। मुझे ऐसा भी लगता है कि हिलेरी पुराना चेहरा होने और लीक की राजनीति पर चलने की घोषणा करते रहने के कारण लीक से अलग हटने और इस क्रम में कई बार विवादों में घिरने के बावजूद ट्रंप से होड़ में पीछे छूट गई।
तमाम विवाद के बावजूद अमेरिकियों को ट्रंप के नया अंदाज रास आया। खासतौर से रोजगार का अवसर बढ़ाने और आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई की घोषणा ने ट्रंप को बढ़त दिलाई।
(हिमांशु मिश्र से बातचीत पर आधारित)