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कालाधन पर बदला सरकार का स्टैंड, विदेश नहीं देश में जमा कालाधन बनी प्राथमिकता

Thu, 10 Nov 2016 06:25 AM IST
हिमांशु मिश्र/ नई दिल्ली
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साल 2014 में भाजपा का चुनावी मुद्दा तो विदेशी बैंकों में जमा कालाधन था, मगर सत्ता हासिल करने के करीब ढाई साल बाद मोदी सरकार की कालधन के खिलाफ लड़ाई की जगह बदल गई। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोटों का प्रचलन बंद करने के अलावा कई अहम घोषणाओं के जरिए साफ कर दिया है कि सरकार का इरादा अब विदेशों में जमा कालाधन के बदले देश में जमा कालाधन केखिलाफ हल्ला बोलने का है। 
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आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ मानते हैं कि विदेश से काला धन की वापसी की राह में कई तरह की कानूनी, तकनीकी अड़चनों केकारण सरकार के रुख में अचानक परिवर्तन आया। हालांकि विशेषज्ञ स्वीकार करते हैं कि मोदी सरकार के इस फैसले से देश में काला धन रखने वालों की देर सबेर शामत अवश्य आएगी।

विशेषज्ञ लॉर्ड मेघनाथ देसाई कहते हैं लोकसभा चुनाव का यह बड़ा मुद्दा था। यह मुद्दा इतना बड़ा था कि इस मोर्चे पर असफलता सरकार और भाजपा की साख को झटका दे सकती थी। चूंकि विदेशों में जमा कालधन लाने की प्रक्रिया बेहद जटिल है। इस मोर्चे पर सरकार को दूसरे देश के रुख पर निर्भर रहना पड़ता है। यही कारण है कि इस दिशा में शुरुआती कोशिशों का बड़ा नतीजा सामने न आने के बाद मोदी सरकार ने घरेलू कालाधन के खिलाफ सख्ती का मन बनाया। 
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बकौल देसाई निश्चित रूप से इस फैसले का सबसे बड़ा असर देश की राजनीति पर पड़ेगा, क्योंकि चुनावी व्यवस्था को कालाधन ने अपनी चपेट में ले रखा है। इसके अलावा सरकार की माफी योजना का लाभ नहीं उठाने वाले ऐसे लोग बुरी तरह घिरेंगे जिन्होंने व्यापक पैमाने पर कालाधन इकठ्ठा कर रखा है। इस फैसले का निष्कर्ष पर आने से पहले हमें इस तथ्य पर भी गौर करना चाहिए कि इस समय काला धन की समानांतर अर्थव्यवस्था चल रही है। अनुमान के मुताबिक यह जीडीपी का करीब 40 फीसदी माना जाता है।

इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्ट्यिट के प्रो अभिरूप सरकार के मुताबिक कालाधन के खिलाफ सख्त कदम की जरूरत तो है, मगर इस बहाने बुधवार को जो कुछ हुआ उससे स्थिति में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं आने वाला। बकौल सरकार इस मामले से जुड़ी बड़ी मछली अपना धन कैश में देश के अंदर नहीं बल्कि स्विस बैंकों में रखती है। मगर यह सही है कि देश में एक बड़ा वर्ग इस फैसले से प्रभावित होगा।
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महत्वपूर्ण तथ्य
- ग्लोबल फाइनेङ्क्षसग इंटेग्रेटी के मुताबिक वर्ष 2003 से 2012 तक 27 लाख करोड़ की रकम जमा हुई विदेशी बैंकों में
- घरेलू कालाधन देश की अर्थव्यवस्था का 40 फीसदी तक होने का अनुमान
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