'हमें नेताजी के मूल्यों का सम्मान भी करना होगा'
प्रधानमंत्री मोदी के इस एलान के कुछ घंटों बाद की नेताजी की बेटी अनीता बोस-फाफ ने कहा था कि मेरे पिता ने एक ऐसे भारत का स्वप्न देखा था जहां सभी धर्मों के लिए जगह होगी। नेताजी के लिए श्रद्धांजलि के लिए केवल प्रतिमा नहीं होनी चाहिए, हमें उनके मूल्यों का भी सम्मान करना चाहिए।
नेताजी के पोते चंद्र कुमार बोस ने भी सरकार से उनकी विचारधारा को देश में लागू करने का अनुरोध किया है। चंद्र कुमार बोस ने कहा, 'केवल प्रतिमा बना कर, संग्रहालय का निर्माण कर या झांकी बना कर नेताजी का सम्मान नहीं किया जा सकता। नेताजी जैसी शख्सियत का सम्मान केवल देश के सभी समुदायों को एकजुट करने के प्रति समर्पित उनकी समावेशी विचारधारा को अपना कर ही किया जा सकता है।'
टीएमसी ने केंद्र सरकार से की है खुलासे की मांग
माना जाता है कि बोस का निधन 70 साल से पहले हुआ था, लेकिन उनकी मृत्यु के समय, वर्ष और स्थान पर अभी भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) केंद्र सरकार से मांग कर चुकी है कि 1945 में बोस की गुमशुदगी पर फाइलें सार्वजनिक की जाएं और जापान के एक मंदिर में रखी राख को डीएनए एनालिसिस के लिए भेजा जाए, जो नेताजी की मानी जाती है।
'प्रतिमा शानदार श्रद्धांजलि, लेकिन रहस्य भी खुले'
सुभाष चंद्र बोस के जीवन और मृत्यु के रहस्यों पर शोध करने वाले अनुज धर का कहना है कि राष्ट्रीय राजधानी में नेताजी की प्रतिमा स्थापित करना एक शानदार श्रद्धांजलि है लेकिन समय आ गया है कि उनकी मृत्यु के पीछे का रहस्य सबके सामने आए। उन्होंने कहा कि नेताजी के बारे में हमें अब तक जो भी जानकारी जारी की गई है वह बताती है कि नेताजी वह कारण थे जिसके चलते भारत आजाद हो पाया था।
'फाइलें सार्वजनिक करने का यह सबसे सही समय'
उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में उनकी मृत्यु से जुड़े मुद्दों को भी संबोधित किया जाएगा। धर ने कहा, 'सभी फाइलों को सार्वजनिक करने का इससे बेहतर समय नहीं हो सकता। पहली बार केंद्र और राज्य की सरकार के बीच नेताजी को लेकर कोई विरोध नहीं है। वह इस मुद्दे पर समान विचार रखते हैं। टीएमसी ने भी नेताजी की गुमशुदगी और मृत्यु पर फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग की है।'