फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बोस के परिवार की अपील: सच्चा सम्मान करने के लिए नेताजी की समावेशी और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा अपनाएं

Sun, 23 Jan 2022 04:24 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनीता बोस-फाफ का कहना है कि उनके प्रति सही मायनों में सम्मान प्रकट करने के लिए जरूरी है कि उनकी विचारधारा को अपनाया जाए और उनके मूल्यों का सम्मान किया जाए।
विज्ञापन
नेताजी सुभाष चंद्र बोस - फोटो : फाइल
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु अभी भी रहस्यों के घेरे में है और इसे लेकर इस समय खूब चर्चाएं हो रही हैं। वहीं, नेताजी के परिवार और उनके जीवन व कार्यों पर करीबी से शोध करने वाले लोगों का कहना है कि उनके प्रति सम्मान प्रकट करने का सही रास्ता उनकी समावेश की विचारधारा और धर्मनिरपेक्षता को अपनाना है। 

विज्ञापन


केंद्र सरकार ने शुक्रवार को एलान किया था कि नेताजी की एक विशाल प्रतिमा राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में स्थापित की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि ग्रेनाइट से बनने वाली इस प्रतिमा का काम जब तक पूरा नहीं हो जाता तब तक वहां एक विशेष होलोग्राम प्रतिमा तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा था कि मैं 23 जनवरी को नेताजी की जयंती के अवसर पर इस होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण करूंगा।

Trending Videos

'हमें नेताजी के मूल्यों का सम्मान भी करना होगा'
प्रधानमंत्री मोदी के इस एलान के कुछ घंटों बाद की नेताजी की बेटी अनीता बोस-फाफ ने कहा था कि मेरे पिता ने एक ऐसे भारत का स्वप्न देखा था जहां सभी धर्मों के लिए जगह होगी। नेताजी के लिए श्रद्धांजलि के लिए केवल प्रतिमा नहीं होनी चाहिए, हमें उनके मूल्यों का भी सम्मान करना चाहिए। 

नेताजी के पोते चंद्र कुमार बोस ने भी सरकार से उनकी विचारधारा को देश में लागू करने का अनुरोध किया है। चंद्र कुमार बोस ने कहा, 'केवल प्रतिमा बना कर, संग्रहालय का निर्माण कर या झांकी बना कर नेताजी का सम्मान नहीं किया जा सकता। नेताजी जैसी शख्सियत का सम्मान केवल देश के सभी समुदायों को एकजुट करने के प्रति समर्पित उनकी समावेशी विचारधारा को अपना कर ही किया जा सकता है।'

टीएमसी ने केंद्र सरकार से की है खुलासे की मांग
माना जाता है कि बोस का निधन 70 साल से पहले हुआ था, लेकिन उनकी मृत्यु के समय, वर्ष और स्थान पर अभी भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) केंद्र सरकार से मांग कर चुकी है कि 1945 में बोस की गुमशुदगी पर फाइलें सार्वजनिक की जाएं और जापान के एक मंदिर में रखी राख को डीएनए एनालिसिस के लिए भेजा जाए, जो नेताजी की मानी जाती है।

'प्रतिमा शानदार श्रद्धांजलि, लेकिन रहस्य भी खुले'
सुभाष चंद्र बोस के जीवन और मृत्यु के रहस्यों पर शोध करने वाले अनुज धर का कहना है कि राष्ट्रीय राजधानी में नेताजी की प्रतिमा स्थापित करना एक शानदार श्रद्धांजलि है लेकिन समय आ गया है कि उनकी मृत्यु के पीछे का रहस्य सबके सामने आए। उन्होंने कहा कि नेताजी के बारे में हमें अब तक जो भी जानकारी जारी की गई है वह बताती है कि नेताजी वह कारण थे जिसके चलते भारत आजाद हो पाया था। 

'फाइलें सार्वजनिक करने का यह सबसे सही समय'
उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में उनकी मृत्यु से जुड़े मुद्दों को भी संबोधित किया जाएगा। धर ने कहा, 'सभी फाइलों को सार्वजनिक करने का इससे बेहतर समय नहीं हो सकता। पहली बार केंद्र और राज्य की सरकार के बीच नेताजी को लेकर कोई विरोध नहीं है। वह इस मुद्दे पर समान विचार रखते हैं। टीएमसी ने भी नेताजी की गुमशुदगी और मृत्यु पर फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग की है।'
विज्ञापन

नेताजी के भतीजे ने की यह बात
सुभाष चंद्र बोस के भतीजे अर्धेंदु बोस का कहना है कि वह गांधी का शांति आंदोलन नहीं था, जिसने भारत को स्वतंत्रता दिलाई। आजाद हिंद फौज और नेताजी की गतिविधियों ने इस देश को स्वतंत्रता दिलाई और इसे इंग्लैंड के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लेमेंट रिचर्ड एटली ने इस बात को स्वीकार किया था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें