तेलंगाना उच्च न्यायालय ने गुरुवार को विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले में तीनों आरोपियों को जमानत दे दी। रामचंद्र भारती, नंद कुमार और डीपीएसकेवी सिंहयाजी को अदालत ने सशर्त जमानत दी। न्यायमूर्ति बी सुमलता ने आरोपियों को तीन लाख रुपये का निजी मुचलका और दो-दो जमानतदार देने का निर्देश दिया। अदालत ने उन्हें हर सोमवार को एसआईटी के सामने पेश होने का भी निर्देश दिया है। बता दें कि पिछले महीने 24 नवंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एसआईटी को कथित टीआरएस विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में जांच आगे बढ़ाने और किसी भी प्राधिकरण के समक्ष रिपोर्ट नहीं करने के लिए विभिन्न निर्देश जारी किए गए थे, चाहे वह राजनीतिक या कार्यकारी हो।
विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले में तीन आरोपियों को किया गया था गिरफ्तार
बता दें कि टीआरएस विधायकों में से एक पायलट रोहित रेड्डी की शिकायत के आधार पर, 26 अक्तूबर की रात को तीन आरोपियों- रामचंद्र भारती, कोरे नंद कुमार और सिम्हायाजी स्वामी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए थे। केसीआर की पार्टी के विधायकों ने आरोप लगाया था कि हमें दल बदलने के लिए रिश्वत देने का प्रयास किया गया। कहा जा रहा है कि तेलंगाना राष्ट्र समिति के चार विधायकों से 100 करोड़ से ज्यादा की रिश्वत की पेशकश की गई थी।
टीआरएस नेता सीबीआई के सामने पेश हुए
इस बीच तेलंगाना के मंत्री गंगुला कमलाकर और राज्यसभा सांसद वद्दीराजू रविचंद्र सीबीआई के समक्ष पेश हुए। मामला कथित तौर पर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी बनकर लोगों से पैसे लेने से जुड़ा था। जानकारी के मुताबिक, नागरिक आपूर्ति मंत्री कमलाकर और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के दोनों नेताओं रविचंद्र को सीबीआई ने पूछताछ के लिए पेश होने के लिए बुलाया था।
सीबीआई ने सोमवार को एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जिसने कथित तौर पर यहां तमिलनाडु भवन में निजी व्यक्तियों से मुलाकात की और खुद को एजेंसी का संयुक्त निदेशक बताया। उसने महंगे उपहार मांगे। उसकी पहचान विशाखापत्तनम निवासी कोवी रेड्डी श्रीनिवास राव के रूप में हुई है। एजेंसी राव के कथित राजनीतिक संबंधों की जांच कर रही है।