रोहिंग्या घुसपैठ के संबंध में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए त्रिपुरा पुलिस ने शनिवार को कहा कि वह अवैध घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह दृढ़ है। दरअसल, असम के मुख्यमंत्री ने चिंता जताई थी कि दलाल त्रिपुरा के रास्ते रोहिंग्या को असम में लाते हैं।
सीएम सरमा की टिप्पणी को लेकर त्रिपुरा पुलिस ने ट्वीट किया, त्रिपुरा पुलिस अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय में रोहिंग्या सहित अवैध प्रवासन के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। इस साल जून तक, रोहिंग्या और दलालों सहित कुल 354 अवैध अप्रवासियों को त्रिपुरा पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
असम सीएम सरमा का बयान
इससे पहले, सीएम सरमा ने शनिवार को कहा कि रोहिंग्या देश के लिए खतरनाक हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। मुख्यमंत्री ने कहा, दलालों का एक नेटवर्क रोहिंग्याओं को त्रिपुरा लाता है, वहां से उन्हें असम के करीमगंज और फिर देश के अन्य हिस्सों में भेजा जाता है। वे असम में नहीं रहते, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में चले जाते हैं। उन्होंने कहा, दलालों के खिलाफ कार्रवाई के फिलहाल असम की पांच पुलिस टीमें त्रिपुरा में गई हैं। बिना वैध कागजात के देश में अवैध रूप से प्रवेश करने वाला कोई भी व्यक्ति देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। उन्होंने कहा, इस बारे में हमने पहले ही केंद्र को सूचित कर दिया है और त्रिपुरा सरकार के अलावा केंद्रीय एजेंसियों से भी मदद मांगी है।
सेंथिल मामला: हाईकोर्ट ने रद्द की हमले के आरोपियों की जमानत
इधर, मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के मंत्री सेंथिल बालाजी मामले में आयकर अधिकारियों पर हमले के 19 आरोपियों की जमानत रद्द कर दी। हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने करूर की निचली अदालत की तरफ से दी गई जमानत को रद्द करते हुए आरोपियों को ट्रायल कोर्ट में समर्पण करने का आदेश दिया। आयकर विभाग ने जमानत के खिलाफ याचिका दायर करते हुए दलील दी थी कि सरकारी अधिकारियों के पर हमले के आरोपियों को जमानत देना उचित नहीं है।