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Tripura BJP Politics: भाजपा के पांच मुख्यमंत्री दूसरे दलों से आए, कोई आते ही तो कोई चंद महीनों में बना सीएम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Sun, 15 May 2022 11:46 AM IST

सार

साहा भाजपा के ऐसे इकलौते मुख्यमंत्री नहीं हैं, जो कांग्रेस या दूसरे दल से आए हैं। मौजूदा राजनीतिक नक्शा देखा जाए तो इस वक्त भाजपा शासित पांच राज्य ऐसे हैं, जहां दूसरी पार्टियों से आने वाले नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया गया है।
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BJP Politics - फोटो : Amar ujala
त्रिपुरा में चुनाव से ठीक पहले सियासी बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने इस्तीफा दे दिया। उनकी जगह पार्टी ने त्रिपुरा भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद माणिक साहा को नए मुख्यमंत्री के रूप में चुना है। साहा 2016 में ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे। पेशे से दंत चिकित्सक साहा पिछले महीने ही राज्यसभा सांसद चुने गए हैं।  

साहा भाजपा के ऐसे इकलौते मुख्यमंत्री नहीं हैं, जो कांग्रेस या दूसरे दल से आए हैं। मौजूदा राजनीतिक नक्शा देखा जाए तो इस वक्त भाजपा शासित पांच राज्य ऐसे हैं, जहां दूसरी पार्टियों से आने वाले नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया गया है। आइए सभी के बारे में जानते हैं... 

 
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BJP Politics - फोटो : Amar ujala
त्रिपुरा में चुनाव से ठीक पहले सियासी बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने इस्तीफा दे दिया। उनकी जगह पार्टी ने त्रिपुरा भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद माणिक साहा को नए मुख्यमंत्री के रूप में चुना है। साहा 2016 में ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे। पेशे से दंत चिकित्सक साहा पिछले महीने ही राज्यसभा सांसद चुने गए हैं।  

साहा भाजपा के ऐसे इकलौते मुख्यमंत्री नहीं हैं, जो कांग्रेस या दूसरे दल से आए हैं। मौजूदा राजनीतिक नक्शा देखा जाए तो इस वक्त भाजपा शासित पांच राज्य ऐसे हैं, जहां दूसरी पार्टियों से आने वाले नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया गया है। आइए सभी के बारे में जानते हैं... 
 

1. पेमा खांडू, मुख्यमंत्री अरुणाचल प्रदेश

पेमा खांडू, मुख्यमंत्री अरुणाचल प्रदेश - फोटो : अमर उजाला
अरुणाचल प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री पेखा खांडू ने अपनी पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय से की है। पेमा ने अपनी राजनीतिक शुरुआत कांग्रेस से की। 2005 में उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी का सचिव बनाया गया। पेमा के पिता भी अरुणाचल प्रदेश के बड़े कांग्रेसी नेता रहे हैं। 2011 में उनकी मृत्यु के बाद पेमा को अरुणाचल प्रदेश सरकार के जल संसाधन और पर्यटन मंत्री की जिम्मेदारी मिली। 16 जुलाई 2016 को पेमा कांग्रेस विधायक दल के नेता चुने गए, लेकिन सितंबर 2016 में ही वह कांग्रेस के 43 विधायकों के साथ उन्होंने पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल प्रदेश बना ली। इसके बाद भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई। तीन महीने बाद यानी दिसंबर 2016 में वह 33 विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए और मुख्यमंत्री बन गए। 
 

2. एन बीरेन सिंह, मुख्यमंत्री, मणिपुर

एन बीरेन सिंह - फोटो : अमर उजाला
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह भी इसी सूची में शामिल हैं। शुरुआती दौर में उन्होंने अपने करियर के लिए फुटबॉल को चुना। इसके बाद सीमा सुरक्षा बल के जवान बन गए। बीएसएफ में रहते हुए वर्ष 1992 में एन बीरेन सिंह की रूचि पत्रकारिता की तरफ हुई। उन्होंने मणिपुर के ही स्थानीय अखबार नाहरोल्गी थोउदांग में नौकरी शुरू की। पत्रकारिता जगत में वो काफी तेजी से आगे बढ़ते गए। 2001 तक वो अखबार के संपादक बन गए। 2002 से उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की।

मणिपुर की डेमोक्रेटिक रेवोल्यूशनरी पीपुल्स पार्टी का दामन थाम लिया। हेनगांग सीट से चुनाव लड़े और जीत दर्ज की। वर्ष 2003 में बीरेन सिंह कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्हें मणिपुर सरकार में वन और पर्यावरण मंत्रालय का जिम्मा मिला। 2007 में उन्होंने दोबारा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इस बार ओकराम इबोबी सिंह की सरकार में उन्हें सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मंत्रालय के साथ-साथ युवा मामलों-खेल मंत्रालय का प्रभार दिया गया।

2012 में वो लगातार तीसरी बार विधायक बने। 2016 में तत्कालीन सीएम ओकराम इबोबी सिंह से उनका विवाद बढ़ गया। इसी के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया। 2017 में एन बीरेन सिंह भाजपा से विधायक बने और मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल की। विधानसभा चुनाव 2022 में भी वो लगातार 5वीं बार विधायक बने हैं और फिर से सीएम की कुर्सी मिल गई। 
 

3. हिमंत बिस्वा सरमा, मुख्यमंत्री, असम

हिमन्त विश्व सरमा, मुख्यमंत्री असम - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने वालों में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का नाम भी है। असम के जोरहाट में पैदा हुए सरमा ने कांग्रेस के साथ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। साल 2001 से 2015 तक जालुकबारी विधानसभा क्षेत्र में उन्होंने कांग्रेस का दबदबा कायम रखा। 15 साल तक वे इस सीट से विधायक रह चुके हैं। साल 2011 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी। 2015 में सरमा ने कांग्रेस छोड़ दी और भाजपा जॉइन कर ली। साल 2016 असम में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी। इस कामयाबी के पीछे सर्बानंद सोनोवाल के अलावा हेमंत सरमा की भूमिका भी थी। 2016 में तो सर्बानंद को मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन 2021 में भाजपा को जब दोबारा जीत मिली तो सर्बानंद को केंद्री मंत्री बनाकर हिमंत बिस्वा सरमा को मुख्यमंत्री बना दिया गया।
 

4. मणिक साहा, मुख्यमंत्री, त्रिपुरा

माणिक साहा - फोटो : सोशल मीडिया
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब के इस्तीफे के बाद राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में मणिक साहा के नाम पर मुहर लगी है। मणिक त्रिपुरा भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद हैं। साहा पेशे से दंत चिकित्सक हैं। साहा साल 2016 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे, जिसके बाद 2020 में उन्हें पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। 
 

5. .बसवराज बोम्मई, मुख्यमंत्री, कर्नाटक

बीएस बोम्मई, मुख्यमंत्री कर्नाटक - फोटो : अमर उजाला
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने भी 2008 में भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था। इसके पहले उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत 1998 में जनता दल से की थी। 2008 से 2013 के बीच जब येदियुरप्पा मुख्यमंत्री थे, तब वह जल संसाधन मंत्री भी थे। 2019 में जब दोबारा भाजपा की सरकार बनी और बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने बोम्मई को कानून मंत्री बनाया गया। 28 जुलाई 2021 को जब भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से हटाया तो उनकी जगह बोम्मई को ही कुर्सी सौंप दी।
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