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BJP: त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड में भाजपा की होगी अग्निपरीक्षा, काफी पहले से ही रणनीति बना रही पार्टी

Thu, 19 Jan 2023 06:32 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

पिछले करीब नौ वर्ष में भाजपा पूर्वोत्तर में सबसे बड़ी सियासी ताकत के रूप में उभरी है। यहां के दो सबसे अहम राज्यों असम और त्रिपुरा में पार्टी की अपने बल पर सरकार है, जबकि अन्य सभी राज्यों में पार्टी की सरकार में सहयोगी की भूमिका है।
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भाजपा (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : Social Media
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विस्तार
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पूर्वोत्तर के तीन राज्यों त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड में चुनावी बिगुल के साथ ही तीनों राज्यों  में भाजपा  की अग्निपरीक्षा होगी। पार्टी इसके लिए काफी पहले से ही रणनीति बना रही है। इन राज्यों में से त्रिपुरा में भाजपा की अपने दम पर सरकार है तो मेघालय और नगालैंड में पार्टी सरकार में सहयोगी है। ऐसे में इन राज्यों के चुनावी नतीजे भाजपा के मिशन-2024 की तैयारी की सही तस्वीर पेश करेंगे।

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पिछले करीब नौ वर्ष में भाजपा पूर्वोत्तर में सबसे बड़ी सियासी ताकत के रूप में उभरी है। यहां के दो सबसे अहम राज्यों असम और त्रिपुरा में पार्टी की अपने बल पर सरकार है, जबकि अन्य सभी राज्यों में पार्टी की सरकार में सहयोगी की भूमिका है। इसी साल जिन नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें तीन राज्यों में भाजपा की अपनी सरकार है, जबकि तीन राज्यों में वह सरकार में सहयोगी की भूमिका निभा रही है।

त्रिपुरा की जंग सबसे अहम
त्रिपुरा का चुनाव सबसे अहम है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर राज्य में दशकों से जारी वाम मोर्चा के शासन का अंत किया था। इस राज्य में पार्टी ने शून्य सीट से बहुमत हासिल करने और मत प्रतिशत में 41 फीसदी बढ़ोतरी का कीर्तिमान बनाया था।
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राज्य में बने नए सियासी समीकरण
त्रिपुरा में चुनाव से पूर्व कांग्रेस और वाम मोर्चा के बीच गठबंधन ने नया सियासी समीकरण तैयार किया है। बीते चुनाव में भाजपा को भले ही अप्रत्याशित जीत मिली थी, लेकिन इन दोनों का संयुक्त वोट करीब 50 फीसदी था। कांग्रेस और वाम मोर्चा लगातार आदिवासियों में प्रभावशाली टिपराहा स्वदेशी प्रगतिशील गठबंधन को साधने के प्रयास में है। इस बीच राज्य में तृणमूल कांग्रेस बीते कुछ सालों से लगातार सक्रिय रही है। कांग्रेस-वाम मोर्चा को अगर इस मोर्चे पर सफलता मिलती है, तो त्रिपुरा की सियासी जंग बेहद रोचक होगी।

मेघालय और नगालैंड भी भाजपा के लिए महत्वपूर्ण
मेघालय में एनपीपी और नगालैंड में नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी की सरकार है। चूंकि, भाजपा इन दोनों ही राज्यों में सरकार की सहयोगी है। ऐसे में इन राज्यों के नतीजे भी भाजपा के लिए बेहद अहम साबित होंगे। पार्टी जल्द ही दोनों राज्यों में सीट बंटवारे पर बातचीत शुरू करेगी।

हर चुनाव जीतने का किया है आह्वान
भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की मंगलवार को संपन्न हुई बैठक में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस साल होने वाले सभी विधानसभा चुनावों को आगामी लोकसभा चुनाव के लिए अहम बताते हुए सभी राज्यों में जीत हासिल करने का आह्वान किया है। जाहिर तौर पर पार्टी इस साल बेहतर प्रदर्शन कर आगामी लोकसभा चुनाव में फिर से अजेय रहने की राह पर चलते रहना चाहती है।

मेघालय : कैबिनेट मंत्री, 4 विधायकों ने दिया इस्तीफा
चुनाव तारीखों के एलान से ठीक पहले मेघालय में पीएचई मंत्री रेनिक्टन टोंगखर और चार मौजूदा विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। विधानसभा के एक अधिकारी ने बताया कि टोंगखर के अलावा तृणमूल कांग्रेस के शीतलंग पाले, निलंबित कांग्रेस विधायक मायरलबॉर्न सिएम और पीटी सॉकमी तथा निर्दलीय विधायक लैम्बोर मालनगियांग ने सदन की सदस्यता से त्यागपत्र दिया है। ये सभी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) में शामिल हो सकते हैं। विधानसभा अध्यक्ष मेतबाह लिंगदोह ही पीडीपी के अध्यक्ष हैं। पीडीपी का कॉनराड संगमा के नेतृत्व वाली     सरकार में अहम सहयोगी दल है। नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के सुप्रीमो संगमा छह दलों के मेघालय डेमोक्रेटिक गठबंधन (एमडीए)      का नेतृत्व कर रहे हैं। भाजपा भी इस एमडीए का हिस्सा है।

महिलाएं संचालित करेंगी 376 केंद्र

  • तीनों राज्यों में 9,000 से अधिक मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। इनमें 376 केंद्र ऐसे होंगे, जो पूरी तरह महिलाओं के जरिये संचालित होंगे।
  • नगालैंड, मेघालय और त्रिपुरा में 80 साल से अधिक के मतदाताओं की संख्या 97,000 है। 31,700 दिव्यांग मतदाता हैं। 2,600 मतदाता 100 वर्ष से अधिक आयु के हैं।


ईवीएम की प्रामाणिकता पर आशंका गलत
बसपा सुप्रीमो मायावती के ईवीएम की प्रामाणिकता पर सवाल उठाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि इसी प्रक्रिया के माध्यम से चुनाव जीत चुके कई राजनीतिक दल पहले भी ईवीएम पर आशंका जता चुके हैं, लेकिन वो अपनी बात को सही साबित नहीं कर सके।

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