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Tripura: त्रिपुरा के हाथों से बुने रिसा को मिला GI टैग, सीएम माणिक ने इस मान्यता के लिए कारीगरों को दी बधाई

Mon, 04 Mar 2024 05:28 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला

सार

साहा ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा, 'त्रिपुरा रीसा को जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग मिलने पर सभी कारीगरों, विशेषकर टीआरएलएम द्वारा प्रवर्तित किला महिला क्लस्टर के कारीगरों को हार्दिक बधाई।
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माणिक साहा। - फोटो : ANI
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विस्तार
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त्रिपुरा के आदिवासी समुदाय के हाथों से बुने कपड़े रीसा को भौगोलिक संकेत यानी (जीआई) टैग मिल गया है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने रविवार को इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने इस मान्यता के लिए कारीगरों, विशेषकर गोमती जिले के किला महिला क्लस्टर के कारीगरों को बधाई दी। 

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साहा ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा, 'त्रिपुरा रीसा को जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग मिलने पर सभी कारीगरों, विशेषकर टीआरएलएम द्वारा प्रवर्तित किला महिला क्लस्टर के कारीगरों को हार्दिक बधाई। इससे निश्चित रूप से हमारे पारंपरिक परिधान को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में मदद मिलेगी। बता दें कि रिसा जनजातियों के सभी त्योहारों और सामाजिक समारोहों में आम है। इसका उपयोग हेडगियर, स्टोल या ऊपरी परिधान के रूप में किया जाता है। 

कई एजेंसियां एसएचजी की कर रहीं मदद
त्रिपुरा ग्रामीण आजीविका मिशन (टीआरएलएम) के पूर्व सीईओ प्रसाद राव ने कहा, 'कई एजेंसियां रीसा बनाने में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की मदद कर रही हैं, जिसका एक विरासत मूल्य है। हाल ही में, हमने नाबार्ड के साथ मिलकर रीसा के लिए जीआई टैग के लिए आवेदन किया और अंततः इसे मान्यता मिल गई। इससे इसकी मांग और कीमत बढ़ाने में मदद मिलेगी।' 
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बिप्लब कुमार देब ने 2018 में राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद रीसा को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आजकल सरकारी कार्यक्रमों के दौरान सम्मान स्वरूप गणमान्य व्यक्तियों को रिसा भेंट किया जाता है।




                                                                                 
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