वाम मोर्चा का गढ़ माने जाने वाले त्रिपुरा में इस बार बीते दो विधानसभा चुनावों के मुकाबले में कम मतदान रिकॉर्ड किया गया। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, राज्य विधानसभा चुनाव में रविवार को 76 फीसदी मतदान हुआ। हालांकि यह आंकड़ा 59 सीटों में से 41 सीटों पर हुए मतदान का है।
नई दिल्ली में उप चुनाव आयुक्त सुदीप जैन ने बताया कि मतदान का प्रतिशत और बढ़ सकता है, क्योंकि चार बजे मतदान के समाप्त होने के बाद भी पोलिंग बूथ के बाहर लंबी कतारें लगी थीं। नए नियमों के अनुसार, लाइन में लगे वोटरों को उनका मत डालने दिया जाता है।
राज्य में मतदान प्रतिशत हमेशा ऊंचा रहा है। साल 2013 के विधानसभा चुनावों में यहां 91.82 फीसदी मतदान हुआ था जबकि 2008 में 91 फीसदी वोट पड़े थे।
राज्य में करीब 24 लाख वोटर हैं। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, राज्य भर में फैले 3,174 मतदान केंद्रों में सुबह मतदान की गति धीमी रही और पहले दो घंटे में महज 11 फीसदी वोट डाले गए। हालांकि इसके बाद मतदान केंद्रों के सामने कतारें लंबी होने लगीं। दोपहर एक बजे तक करीब 46 फीसदी वोट डाले जा चुके थे।
मतदान के दौरान कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना सामने नहीं आई। एक मतदान केंद्र के पास दो क्रूड बम बरामद हुए थे, जिन्हें सुरक्षा बलों ने निष्क्रिय कर दिया। रविवार को राज्य की 60 में से 59 सीटों के लिए संपन्न हुए।
इन सीटों के लिए 23 महिलाओं समेत 292 उम्मीदवार मैदान में थे। चारीलाम सीट पर माकपा उम्मीदवार रमेंद्र नाथ देबबर्मा के निधन की वजह से चुनाव स्थगित कर दिया गया है। यहां 12 मार्च को वोट डाले जाएंगे।