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मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश के लिए इस महिला ने लड़ी है लंबी लड़ाई

Fri, 28 Sep 2018 02:02 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : ANI
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महिलाओं के मंदरों मस्जिदों में प्रवेश को लेकर लंबे समय से विवाद चलता चला आ रहा है। केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर लगी रोक को अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद खत्म कर दिया गया है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश करने और पूजा करने की अनुमति मिलने के पीछे सबसे अहम योगदान महिलाओं के हक और अधिकारों के लिए महिलाएं लंबे समय से लड़ाई लड़ती आ रही हैं। लेकिन हम आपको मिलवा रहे हैं उस महिला से जिसने अचानक एक दिन शनि शिंगणापुर में महिलाओं के साथ धाबा बोल दिया था और खूब सुर्खियां बटोरी थी। महिलाओं के मंदिर में प्रवेश को लेकर लंबी लड़ाई लड़ने का काम कर रहीं तृप्ति देसाई का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। इन्होंने बिना रुके ये लड़ाई जारी रखी और आखिरकार जीत मिली। 

 कौन हैं तृप्ति देसाई

तृप्ति देसाई महिलाओं के मंदिरों और दरगाहों में प्रवेश को लेकर लंबी लड़ाई लड़ी है। इसकी वजह से उन्हें कई बार धमकियां भी मिलीं लेकिन वह पीछे नहीं हटी।

पुणे की रहने वाली तृप्ति महिला के अधिकारों के लिए पिछले कई सालों से काम कर रही हैं इसके लिए उन्होंने 'भूमाता ब्रिगेड' नाम की संस्था भी शुरू की।  संस्था की शाखा सिर्फ पुणे में ही नहीं, अहमदनगर, नासिक और शोलापुर में भी है। पिछले कुछ वर्षों में तृप्ति  महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर और हाजी अली दरगाह में महिलाओं को प्रवेश दिलाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। 
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अन्ना हजारे के साथ कई कार्यक्रमों में प्रदर्शन कर चुकीं तृप्ति कई सामाजिक कार्यों में हिस्सा ले चुकी हैं।  उन्होंने इससे पहले नासिक के त्रयंबकेश्वर, कपालेश्वर मंदिर और कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर में महिलाओं को प्रवेश दिलाने के लिए भी आंदोलन लड़ा है। यह बात भूली नहीं जा सकती कि महिलाओं के मंदिरों में प्रवेश को लेकर तृप्ति ने देशभर में एक आंदोलन  भी चलाया।  मुंबई की एसएनडीटी महिला यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई करने के बाद तृप्ति ने  2010 में भूमाता रणरागिनी ब्रिगेड की स्थापना की। 

तृप्ति देसाई ने सबरीमाला मंदिर पर फैसला आने के बाद मीडिया से बातचीत में बताया हमारा जब आंदोलन शुरू हुआ तो हमारा बहुत विरोध हुआ था, लेकिन हमने 400 साल पुरानी परंपरा तोड़ी और शनि शिंगणापुर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी गई उसके बाद  हाजी अली दरगाह का निर्णय आया।  महिला सशक्तीकरण की बात हमारे आंदोलन के बाद तेज हुई और हमने पुरानी सोच खत्म करने के लिए एक अभियान चलाया।  

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि महिलाओं को समान अधिकार मिले। तृप्ति मीडिया से बातचीत में काफी भावुक दिखीं, उन्होंने कहा कि हमें हंसी आती है समाज की सोच पर कि जिनका जन्म महिलाओं के गर्भ से हो रहा है, उन महिलाओं को अपवित्र ठहराया जा रहा है।  पुरुषों की मानसिकता बदलनी चाहिए।  उन्होंने कहा कि मुझे रोज धमकियां दी जा रही हैं लेकिन मैं उनलोगों से कहना चाहती हूं कि मैं किसी एक धर्म या समुदाय का विरोध नहीं कर रही हूं। आप मुझे धमकियां दीजिए लेकिन मैं डरने वाली नहीं हूं, हम महिलाओं के अधिकार के लिए आंदोलन चलाते रहेंगे। 

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